जज के खिलाफ सुनवाई कर सकती है अदालत
दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 मई को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी निचली अदालत किसी पदासीन न्यायिक अधिकारी के खिलाफ हाईकोर्ट की इजाजत के बिना सुनवाई जारी रख सकती है, लेकिन आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए मुख्य न्यायाधीश की अनुमति आवश्यक है।
न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति एस पी गर्ग की खंडपीठ ने कहा कि एक महिला की ओर से एक पदासीन न्यायाधीश के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने के लिए दायर की गई याचिका पर निचली अदालत सुनवाई करे। महिला ने न्यायाधीश पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
खंडपीठ ने निचली अदालत को आदेश दिया कि वह न्यायाधीश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते वक्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति ले। आदेश में कहा गया है, ‘दंड प्रक्रिया संहिता में संज्ञेय या असंज्ञेय अपराध के मामले में कार्रवाई के लिए जरूरी नहीं है कि उच्च न्यायालय की इजाजत ली जाए। परंतु न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा की बात इसमें शामिल है और किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए इस अदालत के मुख्य न्यायाधीश के इजाजत जरूरी है।’
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