सेवानिवृत्त जज को नहीं मिल सकेगी आजीवन सुरक्षा

सेवानिवृत्त जज, जिला जज और महाधिवक्ताओं को आजीवन चौबीस घंटे सुरक्षा देने के जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश  को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति से कहा कि वह चार सप्ताह के भीतर सुरक्षा स्थिति का आकलन करके आवश्यकतानुसार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के बारे में हाईकोर्ट के आदेश इस संबंध में संशोधित किए जाते हैं.

एनडीटीवी वेबसाइट पर आशीष भार्गव लिखते हैं कि जम्मू कश्मीर सरकार ने सेवानिवृत जज और पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि सेवानिवृत जजों को सुरक्षा देने का आदेश ठीक नहीं है.

उन्होंने कहा कि पूरे देश में वीआईपी व अन्य किसी को भी सुरक्षा गृह मंत्रालय द्वारा तय दिशानिर्देशों में उस व्यक्ति की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए दी जाती है. इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश और व्यापक तंत्र बना हुआ है पूरे देश में उसी का पालन होता है. ये कार्यपालिका का विशेषज्ञता वाला काम है. इसमें इस तरह हाईकोर्ट आदेश नहीं दे सकता.

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने आदेशों मे कह चुका है कि किसी सुरक्षा देनी चाहिए और किसे नहीं देनी चाहिए ये विशेषज्ञता का मसला है और कोर्ट इस बारे में आदेश नहीं दे सकता.

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One thought on “सेवानिवृत्त जज को नहीं मिल सकेगी आजीवन सुरक्षा”

  1. मै प्रिय मेरे पापा के पहली ptni के koe santan nahi hai uske bad मेरे पापा dusra shadi kiye jisse ham hai or मेरे पापा dabdar के post per the to पापा death Kar gye to job hame hoga ya nahi. Or pansan kisko hoga पहली bali patni ko ya dusri patni ko.

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