निचली अदालतों के 21 हजार जजों का वेतन बढ़ेगा

जजों का वेतनजजों वेतन बढ़ाने के लिए 10 नवंबर को केंद्रीय मंत्रीपरिषद ने निचली अदालतों के जजों हेतु राष्ट्रीय दूसरे विधिक वेतन आयोग  के गठन को मंजूरी दे दी.

इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पी वेंकट रामा रेड्डी करेंगे. केरल हाई कोर्ट के पूर्व जज आर बसंत भी इस कमीशन के सदस्य होंगे.

यह आयोग 18 महीने में जजों के वेतन बढ़ाने संबंधित अपने सुझाव राज्य सरकारों को सौंप देगा.

यह कमीशन वेतन बढ़ाने के सुझाव के अलावा निचली अदालतों में काम करने वाले जजों के कामकाज के तरीके, उनके वेतन भत्ते संबंधित दिक्कतों पर भी गौर करेगा और इस प्रक्रिया को सरल और आसान बनाने के सुझाव भी सरकार को देगा.

आयोग स बात का भी उपाय करेगा कि देशभर में निचली अदालतों में काम करने वाले सभी न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों में समानता हो. कमीशन इस बात की भी कोशिश करेगा कि पहले अगर निचली अदालतों के जजों के वेतन भत्तों को तय करने में अलग अलग राज्यों में कुछ अंतर रह गया है या कुछ भेदभाव हुआ है तो उसे ठीक किया जाए.

निचली अदालत में काम करने वाले न्यायाधीशों का वेतन इससे पहले साल 2010 में बढ़ाया गया था, जब उनकी तनख्वाह तीन गुनी हो गयी थी. लेकिन 2010 में जजों के वेतन भत्ते में जो बढ़ोतरी की गई थी उसे पीछे की तारीख यानी 1 जनवरी 2006 से लागू किया गया था.

आज तक की वेबसाइट पर बालकृष्ण की रिपोर्ट है कि इस समय निचली अदालतों के न्यायाधीशों को लगभग 45 हजार से लेकर 80,000 रुपये के करीब वेतन मिलता है.

इसी वर्ष मार्च में ही सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जजों के वेतन -भत्तों में इजाफे का प्रस्ताव दिया था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है.

नए वेतन नियमों के अनुसार, भारत के प्रधान न्यायाधीश को भत्तों के अलावा 2.8 लाख रुपये मासिक वेतन मिलेगा. इससे पहले उन्हें सरकारी आवास, वाहन और दूसरे भत्तों के अलावा प्रति माह 1 लाख रुपये का वेतन मिला करता था.

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