वैवाहिक यौन दुष्कर्म अपराध नहीं माना जा सकता

वैवाहिक यौन दुष्कर्मसुप्रीम कोर्ट ने 10  अगस्त को कहा कि फौजदारी कानून में वैवाहिक यौन दुष्कर्म का अपराध हैं या नहीं, इस पर संसद में व्यापक बहस हो चुकी है। इसे अपराध नहीं माना जा सकता।

दुष्कर्म को परिभाषित करने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 375 की अपवाद वाली उपधारा में कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ स्थापित यौन संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा, बशर्ते पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम न हो।

हालांकि, कोर्ट ने जानना चाहा कि 15 से 18 वर्ष की विवाहित लड़कियों को वैवाहिक यौन दुष्कर्म से बचाने पर संसद ने चर्चा की या नहीं। साथ ही पूछा कि पतियों के यौन शाेषण की इन लड़कियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है या नहीं?

जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि 15 साल से कम आयु की लड़की का विवाह अवैध है। ऐसे भी मामले हैं, जब कॉलेज जाने वाले 18 साल से कम आयु के किशोर-किशोरियां रजामंदी से यौन संबंध बना लेते हैं और उन पर केस दर्ज हो जाता है। इससे किसे परेशानी होने वाली है। लड़के की गलती नहीं है। सात साल की सजा बहुत कठोर है।

बेंच ने कहा कि ऐसी समस्या तब आती है, जब 18 साल से कम की लड़की किसी लड़के के साथ भागकर रजामंदी से यौन संबंध बनाती है लेकिन बाद में लड़के पर दुष्कर्म का केस दर्ज हो जाता है।

बेंच ने केंद्र से तीन हफ्ते में बाल विवाह कानून के तहत बीते तीन वर्ष में अभियोजन के मामलों की संख्या के बारे में पूछा है।

इसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने कहा था कि ‘वैवाहिक दुष्कर्म, विचित्र तरीके से संस्कृति का हिस्सा बन चुका है, महिलाओं के लिए दुष्कर्म के खिलाफ मामला दर्ज करवाना बहुत मुश्किल होता है।

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