केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जज सरकार नहीं चला सकते हैं

जज सरकार नहीं चला सकते जज सरकार नहीं चला सकते हैं और न ही चमत्कार करने के लिये कह सकते हैं! सूखाग्रस्त राज्यों में राहत कार्यों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का  सुप्रीम कोर्ट से यही कहना है ।

सूखाग्रस्त राज्यों में राहत के कदम उठाने के लिये गैर-सरकारी संगठन,  स्वराज अभियान की तरफ से याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार को समय चाहिये।

जस्टिस एमबी लोकुर की बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम  2013 के तहत केंद्र सरकार हर राज्य में खाद्य आयोग  का गठन करे। अदालत  ने कहा कि उन राज्यों में भी कमीशन का गठन किया जाए जिन राज्यों में सूखा नहीं पड़ रहा है।

योगेंद्र यादव के एनजीओ का प्रतिनिधित्व प्रशांत भूषण कर रहे थे और उनकी याचिका का वेणुगोपाल ने कड़ा विरोध किया और कहा कि ये नई याचिका है।

उन्होंने कहा, ‘हर समय एक नई याचिका दायर की जा रही है। ये मुद्दा अनंतकाल तक नहीं चल सकता। हमने एक विस्तृत शपथपत्र दायर किया है और बताया है कि सरकार इस संबंध में कदम उठा रही है। इसका कोई तो अंत होना चाहिये। हुजूर, जज  सरकार नहीं चला सकते हैं।’

वेणुगोपाल ने कहा, ‘हमसे चमत्कार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि ये बहुत बड़ा काम है। हम राज्य सरकार से इस संबंध में बात कर रहे हैं, ताकि बेहतर किया जा सके। सरकार को इसकी चिंता है और तत्परता से काम कर रही है। हमें थोड़ा समय दीजिये। कम से कम 6 महीने का।’

उन्होंने कहा कि अगर हर समय नये मुद्दे उठाएं जाएंगे तो इसका कोई अंत नहीं है। केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

बेंच के एक और जज एन वी रमना ने कहा कि याचिका सिर्फ तीन मुद्दों तक ही सीमित रहेगा। जिसमें मुआवज़े और मजदूरी के भुगतान में देरी, मनरेगा के तहत काम करने के दिनों में कमी, और सामाजिक समीक्षा शामिल हैं।

बेंच ने कहा कि एनएफएसए के तहच सभी राज्यों में इस तरह के समितियों के गठन का प्रावधान है।

सुनवाई के दौरान कई राज्यों के सचिव भी उपस्थित थे। इनमें महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार और कर्नाटक के सचिव शामिल हैं। उन लोगों ने कोर्ट को बताया कि उनके राज्यों में समितियां गठित कर दी गई हैं।

हरियाणा के सचिव ने बताया कि उनके राज्य का मामला पंजाब और हरियाणा हाई  कोर्ट में लंबित है।

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