अनुकंपा में मिली नौकरी की आधी सैलरी बच्चों पर खर्च करनी होगी

अनुकंपा में मिली नौकरीअनुकंपा में मिली नौकरी पाने वाली एक महिला को बच्चों के भरण-पोषण के लिए आधी सैलरी देने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।

दरअसल, इस महिला ने पति की मौत के बाद अनुकंपा पर नौकरी पाई और फिर दूसरी शादी करके बच्चों को अपने माता-पिता के जिम्मे छोड़ दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि महिला की आधी सैलरी बच्चों को परवरिश के लिए दी जाए और फैमिली पेंशन भी बच्चों के लिए उसके नाना को दी जाए।

नवभारत टाइम्स में आई खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें महिला को नौकरी से हटाने के बजाय उसे निर्देश दिया गया था कि वह सैलरी का 50 फीसदी हिस्सा बच्चों की परवरिश के लिए देगी।

कोर्ट के सलाहकार का कहना था कि दूसरी शादी के बाद नियम के तहत फैमिली पेंशन की महिला हकदार नहीं होती और साथ ही मृतक के निर्भरों और परिजनों की सही देखभाल न हो तो भी नौकरी गंवानी पड़ती है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी. लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि बच्चों की उम्र जब तक 25 साल का न हो जाए, तब तक महिला अपनी सैलरी का 50 फीसदी हिस्सा उन्हें भुगतान करे, ताकि बच्चों की देखभाल हो सके। साथ ही फैमिली पेंशन बच्चों के नाना को मिलती रहेगी जिससे बच्चों की भलाई में उसका इस्तेमाल हो सके।

महिला के पति सरकारी नौकरी में थे और उनकी मौत हो गई। अनुकंपा के आधार पर महिला को नौकरी मिली। इसके अलावा फैमिली पेंशन भी मिल रही थी।

नवभारत टाइम्स में राकेश चौधरी के अनुसार एमिकस क्यूरी का कहना था कि अनुकंपा में मिली नौकरी के लिए नियम तय हैं। अगर पति की मौत हो जाए तो महिला को नौकरी मिल सकती है, लेकिन नौकरी के समय दिए गए अंडरटेकिंग के मुताबिक अनुकंपा पर नौकरी के बाद उस सैलरी से मृतक के निर्भर बच्चों और परिजनों की देखभाल करनी होगी।

अगर ऐसा नहीं किया जाता तो नौकरी गंवानी पड़ सकती है। इसके लिए उन्होंने नियम का हवाला दिया। उक्त प्रावधान के तहत याचिकाकर्ता महिला को नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है।

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