किसी से प्यार करने के लिए महिला को मजबूर नहीं किया जा सकता

प्यार करने के लिएकिसी से प्यार करने के लिए महिला को मजबूर नहीं किया जा सकता। उसकी अपनी स्वतंत्र पसंद है। उसके पास किसी शख्स को प्यार करने या न करने का विकल्प है। पुरुषों को इसे मंजूर करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और एमएम शांतानागौदर की बेंच ने 16 साल की लड़की से छेड़छाड़ और उसे खुदकुशी को मजबूर करने के दोषी की अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

दोषी को सात साल की कैद हुई है।

महिलाओं पर बढ़ते अपराधों से नाराज होकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि इस देश में महिलाएं शांति से क्यों नहीं रह सकतीं? इससे पहले आराेपी के वकील ने युवती के मृत्युपूर्व बयान पर संदेह जाहिर किया और कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में भर्ती करने के बाद वह बोलने या लिखने में समर्थ नहीं थी। बेंच ने इसपर आरोपी से कहा कि आपने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि युवती ऐसा करने पर मजबूर हो गई। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर फैसला सुरक्षित रखा है।

जुलाई 2008 में लड़की ने आग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। उसने आरोपी पर छेड़खानी करने और धमकाने का आरोप लगाया था।

जुलाई 2010 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी जहां से आरोपी को सात साल कैद की सजा हुई थी।

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