सहारा – बिड़ला डायरी मामले में जांच कराने की मांग वाली याचिका खारिज

सहारा बिड़ला डायरीसुप्रीम कोर्ट ने सहारा बिड़ला डायरी मामले में जांच कराने की मांग वाली एक याचिका 11 जनवरी को खारिज कर दी. कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की जांच की मांग ठुकरा दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य के खिलाफ जांच कराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

उच्चतम न्यायालय ने प्रशांत भूषण द्वारा पेश किए गए कागजात जांच के लिए पर्याप्त नहीं पाए.

आयकर विभाग के एक छापे  में सहारा के कार्यालय से एक डायरी मिली थी, जिसमे कथित रूप से यह लिखा है कि  2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री को 25 करोड़ रुपये घूस दी गई. उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.  इनके अलावा तीन और मुख्यमंत्रियों को भी कथित घूस दी गई.

सुप्रीम कोर्ट ने इन दस्तावेजों को शून्य बताते हुए याचिकाकर्ता को सहारा बिड़ला डायरी संबंधित पुख्ता प्रमाण पेश करने के लिए कहा था.

याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि आयकर विभाग की अप्रैजल रिपोर्ट, डायरी और ई-मेल साफ-साफ इशारे करती है कि राजनेताओं को रिश्वत दी गई थी, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए.

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि यह विरले ही होता है जब अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष ऐसे पुख्ता दस्तावेज पेश किए गए हों. ऐसे में अगर सहारा बिड़ला डायरी मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जाता तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी मामले में जांच का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा.

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