विधवा बहू अपने सास ससुर से गुजारे भत्ते की हकदार नहीं

विधवा महिला की अपने भरण पोषण के लिए सास-ससुर से गुजारा भत्ता लेने की मांग कानून की दृष्टि में जायज नहीं मानी जा सकती.

उदयपुर में एक विधवा को 4 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता ससुर से दिलाने का आदेश अतिरिक्त सेशन जज, महिला उत्पीड़न मुकद्दमों की अदालत ने रद्द करने के आदेश दिए हैं.

कोर्ट ने आदेश दिया था कि ससुर अपनी पुत्र वधू मोनिका श्रीमाली को प्रतिमाह 4 हजार रुपए गुजारा भत्ता दें.  मोनिका के पति विपिन श्रीमाली की बीमारी से मौत हो गई थी.

ससुर इंद्रवदन ने सत्र न्यायालय में आदेश काे चुनौती दी थी. अपील का फैसला 20 दिसंबर को हुआ. माननीय अदालत ने सास, ससुर ननदों से गुजारा भत्ता मांगना कानून की दृष्टि में जायज नहीं माना.

अदालत ने फैसले में लिखा कि बहू को गुजारा भत्ता देने का ससुर को आदेश देना निचली अदालत का अनुचित निर्णय है. अपीलीय अदालत ने फैसले में लिखा कि नैतिक दायित्व के आधार पर ससुर को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. कानून में सास-ससुर से गुजारा भत्ता लेने की व्यवस्था नहीं है.

अपीलकर्ता  ने अदालत को बताया था कि वे पेंशनर हैं आवास ऋण की किश्तें भर रहे हैं. पुत्र वधु मोनिका बैंक में कार्यरत है और अपना भरण पोषण करने में सक्षम है.

फैसले की प्रति के लिए यहाँ क्लिक करें

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