जस्टिस जगदीश सिंह खेहर बने देश के 44वें मुख्य न्यायाधीश

जस्टिस-जगदीश-सिंह-खेहरजस्टिस जगदीश सिंह खेहर को आज, 4 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद की शपथ दिलायी गई.

कार्यक्रम का आयोजन राष्‍ट्रपति भवन में रखा गया था जिसमें उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मंत्री पहुंचे. जस्टिस खेहर ने भारत के 44वें प्रधान न्यायाधीश के रुप में शपथ ली. उन्हें शपथ राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिलायी.

28 अगस्त 1952 को जन्मे जस्टिस खेहर ने गवर्नमेंट कॉलेज चंडीगढ़ से 1974 में सायंस ग्रेजुएशन किया था. 1977 में उन्होंने पंजाब युनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री ली और बाद में 1979 में एलएलएम पास किया. एलएलएम में उन्होंने पंजाब युनिवर्सिटी में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल हासिल किया था. एलएलएम करने के बाद उन्होंने अपनी वकालत शुरु की.

जस्टिस खेहर ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की.

 जस्टिस जगदीश सिंह खेहर को 1992 में पंजाब का एडिशनल एडवोकेट जनरल बनाया गया और उसके बाद केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का सीनियर स्टैंडिंग काउंसेल बनाया गया.

इस दौरान कई विश्वविद्यालयों और कंपनियों और औद्योगिक समूहों की तरफ से कोर्ट में पैरवी करते नजर आए.

17 नवंबर 2009 को नैनीताल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए और 29 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। आठ अगस्त 2010 को उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

2011 के सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुआ उनका कार्यकाल भी काफी चर्चा में रहा है. सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर दिए गए उनके फैसलों ने हमेशा सुर्खियों बटोरी हैं. जैसे 2-जी स्पेक्ट्रम का मामला जिसमें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ‘प्रेसिडेंशियल रेफरेंस’ की एक याचिका दायर की थी. जस्टिस खेहर की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार को सचेत करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को खैरात में नहीं दिया जा सकता.

जस्टिस जे एस खेहर न्यायपालिका के सम्मान के लिए सख्त फैसले लेने में कभी नहीं चूके हैं. सेबी-सहारा विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में लगातार टालमटोल कर रहे सहारा प्रमुख सुब्रत राय को उन्हीं की बेंच ने जेल भेजा था.

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जज रहते उन्होंने सिख की परिभाषा को लेकर उठे विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया था. उनका फैसला था कि केश कटवाने का मतलब सिख धर्म के बुनियादी सिद्धांत को तोड़ना है. ऐसा करने वाले किसी सिख संस्थान में बतौर सिख लाभ लेने का दावा नहीं कर सकते.

फैसले में उन्होंने लिखा – “धर्म को उसी तरह माना जाना चाहिए जैसा धर्म है. उसे उस तरह नहीं माना जा सकता जैसा हम चाहते हैं.”

64 साल 3 महीने के जगदीश सिंह खेहर 28 अगस्त 2017 तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहेंगे.

जस्टिस जगदीश सिंह खेहर के व्यक्तित्व का दूसरा पहलू यह है कि माता-पिता की सेवा के लिए वकीलों में उनका उदाहरण दिया जाता है.

वे पिता की सेहत को लेकर इस कदर चिंतित रहते थे कि रात में उनका ख्याल रखने के लिए उनके पास सोते थे. दो साल तक पिता की बीमारी में वे हरदम साथ खड़े रहे. फिर चाहे अस्पताल जाना हो या फिर घर पर देखभाल करनी हो.

वर्ष 2007 में उनके पिता का देहांत हो गया. अभी वे 94 वर्षीय मां के साथ रहते हैं.

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