मार्च तक सभी एनजीओ का करना होगा ऑडिट

देशभर के करीब तीस लाख गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के हिसाब-किताब का लेखा-जोखा न होने और उन्हें नियमित करने का कोई तंत्र न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी  को केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया.

अदालत ने 31 मार्च तक सभी एनजीओ का लेखा परीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह एनजीओ को नियमित करने, उन्हें मान्यता देने और उनके निधिकरण  के बारे में दिशानिर्देश तय करे.

उच्चतम न्यायालय  ने अपनी टिप्पणी में कहा कि एनजीओ को दिया गया धन, जनता का है. जनता के पैसे का हिसाब-किताब रखा जाना चाहिए. फंड का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सिविल और आपराधिक  कार्रवाई होनी चाहिए.

सीबीआइ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में करीब 32 लाख 97 हजार एनजीओ हैं जिसमें से सिर्फ 3 लाख सात हजार ने ही अपने खर्च का लेखाजोखा सरकार को दिया है.

ये आदेश मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एनजीओ के फंड में घपले का आरोप लगाने वाली वकील एमएल शर्मा की याचिका पर दिए. कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस याचिका के दाखिल होने के छह साल बाद भी सरकार ने एनजीओ के नियमन के लिए कोई तंत्र विकसित नहीं किया.

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और उसके विभागों के बीच एनजीओ की ऑडिटिंग (लेखाजोखा) को लेकर और वित्त मंत्रालय द्वारा जारी जनरल फाइनेंशियल रूल 2005 को लागू करने के बारे में भ्रम है.

अदालत ने आदेश दिया है कि वे 31 मार्च तक नियमों के मुताबिक सभी एनजीओ का ऑडिट पूरा करके रिपोर्ट दाखिल करें. साथ ही कहा है कि हलफनामा दाखिल करने वाला अधिकारी आइएएस अधिकारी होना चाहिए जो कि संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का नहीं होगा.

इस मामले में अगली सुनवाई पांच अप्रैल को होगी.

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