सोशल वेबसाइट्स पर टिप्पणी के चलते हुई गिरफ्तारी गंभीर

google-facebook-adaalatसुप्रीम कोर्ट ने सोशल वेबसाइट्स पर टिप्पणी के चलते हुई गिरफ्तारी को गंभीर करार दिया है. अदालत, केंद्र सरकार के इस तर्क से सहमत नहीं है कि सोशल साइट्स पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखने के चलते कुछ लोगों की गिरफ्तारी ‘इक्का दुक्का घटनाएं’ हैं उसका कहना है कि अगर ये अपवाद थे तो भी बहुत गंभीर था.

जस्टि‍स जे चेलामेश्वर की अगुवाई वाली बेंच से केंद्र सरकार के वकील ने 9 दिसंबर को कहा कि वह आईटी एक्ट की धारा 66-ए के तहत की गई गिरफ्तारियों को जायज नहीं ठहरा रहे हैं लेकिन ये अफसरों द्वारा अपने अधिकारों के दुरूपयोग की ‘इक्का दुक्का घटना’ थीं. कोर्ट इस कानून के कुछ प्रावधानों को खत्म करने सहित विभिन्न राहत के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

अदालत ने कहा कि भले ही ये अपवाद और इक्का दुक्का घटनाएं हों, लेकिन अधिकारों का उल्लंघन बहुत ही गंभीर है.

उल्लेखनीय है कि आईटी एक्ट की धारा 66-ए में गिरफ्तारी करने और इस संचार माध्यम के सहारे आपत्तिजनक संदेश भेजने के आरोपी को तीन साल की कैद के प्रावधान विवादों में हैं.

एक याचिकाकर्ता की ओर से बहस शुरू करते हुये सीनियर वकील सोली सोराबजी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) में दिए गए बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए और शासन इस अधिकार को कम नहीं कर सकता है. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 19 (2) के तहत इस पर उचित नियंत्रण लगाया जा सकता है.

सोराबजी ने कानून की धारा 66-ए को निरस्त करने का अनुरोध करते हुए कहा कि इसमें ‘अस्पष्टता’ है और यह बहुत ही आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे प्रावधान को निरस्त किया गया है जो अस्पष्ट हों. कोई भी सार्वजनिक बयान किसी न किसी को परेशान कर सकता है.

गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ के वकील प्रशांत भूषण ने भी धारा 66-ए सहित इस कानून के तीन प्रावधानों को निरस्त करने का अनुरोध किया. उनका कहना था कि ये अनुचित प्रावधान लोकतंत्र की हत्या कर देंगे.

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)