कोई भी दागी व्यक्ति मंत्री ना बनाया जाए

दागी मंत्रीआपराधिक मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे लोगों को मंत्री न बनाए जाने का कड़ा संदेश देते हुए उच्चतम न्यायालय ने 27 अगस्त को कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ऐसे लोगों की नियुक्ति से बचना चाहिए और राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए।

भारत के प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने ऐसे लोगों को मंत्री बनने से अयोग्य ठहराने से परहेज किया। उन्होंने ऐसे लोगों के नामों की सिफारिश राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास न भेजने का फैसला प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के विवेक पर छोड़ दिया।

पीठ ने कहा कि वह अनुच्छेद 75 (1) (प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की नियुक्ति) में अयोग्यता नहीं जोड़ सकती, लेकिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ऐसे लोगों को मंत्री बनाने पर विचार नहीं करना चाहिए, जिनकी पृष्ठभूमि आपराधिक रही है और जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत गंभीर मामलों में आरोप तय किए गए हैं।

हिन्दुस्तान की खबर के मुताबिक़ न्यायालय ने आगे कहा कि संविधान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों में गहरा विश्वास रखता है और उम्मीद करता है कि वे संवैधानिक जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ काम करेंगे। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को सलाह दी जाएगी कि वे ऐसे लोगों को अपने मंत्रालयों में शामिल न करें।

पीठ ने यह निर्देश उस जनहित याचिका पर जारी किया, जिसमें मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकारों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की नियुक्ति न करने के निर्देश दिए जाएं। पीठ में न्यायाधीश दीपक मिश्रा, मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ और एस ए बोबडे भी शामिल थे। पीठ ने आम सहमति से इस मामले में फैसला दिया और दो न्यायाधीशों ने अलग विचार दिए।

123 पृष्ठों वाले फैसले में न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि ऐसी भी उम्मीद की जाती है कि प्रधानमंत्री देश की राष्ट्रीय राज्यव्यवस्था के हितों के अनुरूप काम करें। पीठ ने कहा कि उन्हें (प्रधानमंत्री को) यह ध्यान में रखना चाहिए कि अवांछित तत्व या लोग, जो अपराधों की खास श्रेणी के आरोपों का सामना कर रहे हैं, वे संवैधानिक नैतिकता या सुशासन के सिद्धांतों को बाधित कर सकते हैं या उन्हें रोक सकते हैं और इस तरह संवैधानिक विश्वास घटा सकते हैं।

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