फेसबुक टिप्पणी मामले में फटकार, सरकारों से मांगा जवाब

फेसबुक पर की गई टिप्पणी को लेकर पालघर में दो लड़कियों की गिरफ्तारी पर मचे बवाल के बाद आईटी क़ानून की धारा 66ए को रद्द करने की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों और केंद्र सरकार से 4 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।

चीफ जस्टिश अल्तमस कबीर और जस्टिस जे. चेलमेश्वर की बेंच ने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया जाता है कि उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताए जिसके तहत दो लड़कियों शाहीन ढाडा और रिनू श्रीनिवासन को फेसबुक पर कॉमेंट करने और लाइक करने के लिए गिरफ्तार किया गया था ।

बेंच ने दिल्ली की छात्रा श्रेया सिंघल की जनहित याचिका पर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकार को भी इसमें पक्ष बनाया है, जहां पिछले दिनों ऐसी ही घटनाएं हुई थीं। इसने साथ ही दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया और चार हफ्ते के अंदर उनसे जवाब मांगा है। सर्वोच्च अदालत ने मामले की सुनवाई छह हफ्ते बाद तय की है। अदालत ने अटॉर्नी जनरल जी. ई. वाहनवती से भी सहयोग मांगा।

वाहनवती ने याचिका पर कहा, ‘लड़कियों की गिरफ्तारी गलत थी लेकिन आईटी ऐक्ट- 2000 की धारा 66ए को रद्द करने की जरूरत नहीं है। इस मामले में याचिकाकर्ता श्रेया सिंघल ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस जवाब से वह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि हर हाल में अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा होनी ही चाहिए।

गौरतलब है कि बाल ठाकरे के निधन के बाद मुंबई बंद को लेकर एक लड़की ने फेसबुक पर सवाल उठाया था और दूसरी लड़की ने उस कॉमेंट को लाइक किया था। इसके बाद पालघर में दोनों लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और लड़की के चाचा के क्लिनिक में तोड़फोड़ भी की गई थी।

इसके अलावा करीब पश्चिम बंगाल में इस साल अप्रैल में प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को ममता बनर्जी के एक कार्टून को सोशल नेटवर्किंग साइट पर डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।

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