सुप्रीम कोर्ट ने बिना वकील पीड़ित के हक में सुनाया फैसला, मुआवजा भी दुगुना

सुप्रीम कोर्ट ने बीस साल पहले राजस्थान में सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिजन के हक में बिना किसी वकील या दलील के फैसला सुनाया और मुआवजा दोगुना कर दिया। करीब 11 लाख मुआवजे के अलावा बीमा कंपनी को पाँच वर्ष तक एकतरफा रोक आदेश का लाभ लेने पर 5 लाख रू. मुकदमा खर्च भी अदा करने का आदेश दिया।

जस्टिस जीएस सिंघवी एवं जस्टिस सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय की पीठ ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। बीमा कंपनी की ओर से दिग्गज वकील थे लेकिन गरीब परिवार की ओर से कोई नहीं। कोर्ट ने कहा कि शायद परिवार हाई कोर्ट तक ही मुकदमा लड़ते-लड़ते थक गया होगा।

कोर्ट ने कहा कि 1992 में सड़क दुर्घटना में मारे गए 36 वर्षीय नानगराम के परिवार को वास्तव में मात्र 2 लाख रू. मुआवजा मिला और परिवार ने शायद उसे ही किस्मत मान लिया और सुप्रीम कोर्ट की मुकदमेबाजी में खर्च करना मुनासिब नहीं समझा। 9 मार्च 92 को नानगराम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

पीछे बचे पाँच बच्चे, पत्नी और बूढ़े माता-पिता। परिवार ने मुआवजे के लिए दावा किया। सड़क दुर्घटना ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को 2.55 लाख रू. मुआवजा देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 6,45,300 रू. कर दिया। कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुँची और एकतरफा आदेश ले लिया, जिसके मुताबिक कंपनी को 3 लाख रू. जमा कराने होंगे और उसमें परिजन 2 लाख रू. निकाल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पाँच साल लंबित रही। नतीजा परिवार को मात्र 2 लाख रू. ही मिले।

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए मुआवजे का नए सिरे से आकलन किया व राशि बढ़ाकर 10,63,000 रू. कर दी और ब्याज सहित रकम देने का आदेश दिया। अगर 6 सप्ताह में रकम नहीं दी तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा 5 लाख रू. मुकदमा खर्च भी देना होगा।

फैसले की प्रति यहाँ क्लिक कर ली जा सकती है

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 10.0/10 (3 votes cast)
सुप्रीम कोर्ट ने बिना वकील पीड़ित के हक में सुनाया फैसला, मुआवजा भी दुगुना, 10.0 out of 10 based on 3 ratings

4 thoughts on “सुप्रीम कोर्ट ने बिना वकील पीड़ित के हक में सुनाया फैसला, मुआवजा भी दुगुना”

    1. श्रवण जी,
      आपके अनुरोध पर फैसले की प्रति संलग्न कर दी गई है
      आपकी दी गई लिंक से केवल उस साधन तक पहुंचा जा सकता है

      VN:F [1.9.22_1171]
      Rating: +2 (from 2 votes)
  1. ऐसे सराहनीय फैसले मात्र कुछ ही क्यों आते हैं |जनता की अपेक्षा है कि सुप्रीम कोर्ट का तो हर फैसला सराहनीय होना चाहिए| लगता है देश में नाक बचाने और सस्ती लोकप्रियता की सभी को आवश्यकता है|

    VA:F [1.9.22_1171]
    Rating: +2 (from 2 votes)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)