रसूखदारों के कब्जे की जाच करेगा ट्रिब्यूनल

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justiceपंजाब एंव हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ के आसपास रसूखदारों के कब्जे के मामलों की जाच करने के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने का फैसला सुना दिया है। हाई कोर्ट ने 29 मई को फैसला सुनाते हुए यह साफ कर दिया कि जिस मामले में पंजाब के रसूखदार और हाई प्रोफाइल लोगों के नाम शामिल हैं, उसकी जाच के लिए जो ट्रिब्यूनल गठित किया गया है, उसके पास न्यायिक शक्तिया होंगी।

यह न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ के आसपास सहित जिला मोहाली, फतेहगढ़ साहिब एवं पटियाला के गावो में भी इस तरह के रसूखदारों के कब्जों के मामलों की जाच करेगा।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ एवं वरिष्ठ एडवोकेट अरुण जैन व एमएल सरीन सभी ने इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जस्टिस कुलदीप सिंह के नाम की सिफारिश की है। तय है कि यह ट्रिब्यूनल जस्टिस कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में गठित किया जाएगा। जिसमें हरियाणा के सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बारूनाथ गुप्ता व एडवोकेट पीएन अग्रवाल को शामिल किया जाएगा। पीएन अग्रवाल संपत्ति विवादों के मामलों के माहिर माने जाते है।

खंडपीठ के अनुसार न्यायाधिकरण चार महीने में जाच कर अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेगा। जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल के कार्यकाल को प्रत्येक माह के आधार पर बढ़ाया जा सकता है। हालाकि सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने ट्रिब्यूनल गठित किए जाने का विरोध किया था, परतु खंडपीठ के अनुसार जिन मामलों की जाच की जा रही है, उनमें रसूखदारों व कई बड़ी कंपनियों के नाम शामिल है। ऐसे में कोई भी एजेंसी बिना प्रभाव के कार्य नहीं कर सकेगी। लिहाजा केवल ट्रिब्यूनल ही इस मामले की निष्पक्षता से जाच कर सकता है। अरुण जैन व एमएल सरीन ने खंडपीठ को सौंपे अपने सुझावों में कहा है कि ट्रिब्यूनल को समन करने, गवाहों के बयान दर्ज करने एवं सभी दस्तावेजों को मंगवाने के अधिकार होंगे।

खंडपीठ ने सुझाव मानते हुए ट्रिब्यूनल को सिविल कोर्ट की शक्तिया प्रदान करने के आदेश दिए है। ट्रिब्यूनल को पंजाब के राजस्व विभाग, ग्रामीण एवं पंचायत विभाग एवं वन विभाग द्वारा सहयोग किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित गाव व विवादित भूमि से जुड़े सभी नए-पुराने रिकार्ड्स की जाच ट्रिब्यूनल कर सकेगा। ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के आसपास की सरकारी भूमि, शामलात भूमि, वन भूमि एवं नजूल भूमि विशेष तौर पर कानूनगो की विशेष सेवाएं लेगा।

ट्रिब्यूनल यह भी जाच करेगा कि रसूखदारों के पास जो भूमि है, इनसे पहले इस भूमि का मालिकाना हक किसके पास था व भूमि किस प्रकृति की थी। पंजाब सरकार को इस ट्रिब्यूनल की जाच में सहयोग करने के निर्देश दे दिए गए है। ट्रिब्यूनल में पंजाब सचिवालय के कíमयों की भी सेवाएं ली जाएंगी। ट्रिब्यूनल का कार्यालय कहा होगा, इस पर भी शीघ्र फैसला कर लिया जाएगा।

हालाकि ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों को क्या वेतन दिया जाएगा, इसका फैसला खंडपीठ पंजाब के एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल सहित वरिष्ठ एडवोकेट अरुण जैन एवं एमएल सरीन के साथ विचार-विमर्श कर तय करेगा। खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि शुरुआती दौर में सेवानिवृत्त आईजी चंद्रशेखर ने चंडीगढ़ के आसपास रसूखदारों के कब्जों के मामलों में 60 लोगों की जो सूची सौंपी थी, उस पर भी ट्रिब्यूनल जाच करेगी।

एमएल सरीन ने बताया कि पंजाब भर में रसूखदारों द्वारा कब्जे के लगभग 800 से अधिक मामले हाई कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में इन मामलों की एक साथ सुनवाई बेहद जरूरी है। खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले में ट्रिब्यूनल गठित कर दिया है।

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