अल्प वयस्क विवाहित हिन्दू लड़की का स्वाभाविक अभिभावक उसका पति

एक युवक को राहत प्रदान करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने उसकी अल्प वयस्क पत्नी को उसके संरक्षण में रखने का आदेश दिया है। युवक ने लड़की के साथ भागकर उससे विवाह किया था और उस पर लड़की के अपहरण का मुकदमा चल रहा था। सत्र न्यायाधीश संजय गर्ग ने पूर्वी दिल्ली की निवासी 16 वर्षीय लड़की का संरक्षण उत्तर प्रदेश निवासी उसके पति को दे दिया।

लड़की ने इससे पूर्व अदालत से कहा था कि वह अपने अभिभावकों या महिला सह बाल कल्याण गृह निर्मल छाया की बजाय अपने पति के साथ रहना पसंद करेगी। न्यायाधीश गर्ग ने इस मामले में उच्च न्यायपालिका के फैसलों पर भरोसा जताया।

इन फैसलों के अनुसार विवाहित हिन्दू अल्पव्यस्क लड़की का स्वाभाविक अभिभावक उसका पति है। अल्पव्यस्क की प्राथमिकता को, जो समझदार ढंग से निर्णय करने में सक्षम हो, अदालत द्वारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘लड़की को निर्मल छाया भेजने की जरूरत नहीं है। अल्पव्यस्क होने के कारण उसकी इच्छा के अनुरूप उसका संरक्षण उसके अपीलकर्ता पति को दिया जाता है। पुनरीक्षा याचिका को मंजूरी दी जाती है।’’ सत्र न्यायालय ने बाल कल्याण समिति के आदेश को खारिज करते हुए यह आदेश सुनाया। समिति ने अल्प वयस्क लड़की का संरक्षण उसके पति को देने से इंकार कर दिया था।

युवक को अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किये जाने के बाद पिछले पांच माह से लड़की निर्मल छाया में रह रही थी। युवक ने जमानत मिलने के बाद अपनी पत्नी का संरक्षण प्राप्त करने के लिए पहले बाल कल्याण समिति और फिर सत्र न्यायालय का द्वार खटखटाया। उसने सत्र न्यायालय में कहा कि समिति ने अपना आदेश तथ्यों पर ध्यान दिये बिना मशीनी ढंग से दिया है।

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