चीनी पतंग डोर पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका

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manjaपंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तरनतारन निवासी गौतम कुमार द्वारा जनहित याचिका दायर कर चीन निर्मित पतंग की डोर की बिक्री और स्टॉक पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया है।

याचिका में अमृतसर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दिए 22 नवंबर के आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें 22 नवंबर से 20 जनवरी तक इस डोर की बिक्री और उपयोग पर पाबंदी लगाई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर आधारित खंडपीठ ने इस याचिका का निपटारा करते हुए जिला मजिस्ट्रेटों को इस संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में कहा गया है कि बसंत उत्सव पर पूरे पंजाब में दुकानदार इस चीन निर्मित डोर का स्टॉक इकट्ठा कर लेते हैं। खासकर अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा और पटियाला में पतंगबाजी अधिक होती है। लिहाजा यहा पर इस डोर की बिक्री सबसे ज्यादा होती है।

याचिका में कहा गया है कि चूंकि दुकानदार इसे हॉट केक की तरह बेचते हैं, तो मासूम बच्चों से लेकर युवा वर्ग तक इसको इस्तेमाल में लाता है। यह डोर काच जड़ित होती है, लिहाजा बच्चों के हाथ कटने के मामलों में भी बेहद इजाफा हो जाता है। दूसरी ओर पतंगबाजी के दिनों में ये डोरें एक जाल की तरह पूरी इलाके को घेर लेती है। अगर किसी का गला ऐसे में इस डोर की चपेट में आ जाए, तो वह कट सकता है।

याचिका में कहा गया है कि इस खतरे को भापते हुए अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट ने एक माह के लिए इस डोर पर पाबंदी लगाई थी, बावजूद इसके कई दुकानदारानें ने आदेशों की अवेहलना करते हुए चोरी से इस डोर को बेचा, साथ ही कई ने इसका स्टॉक तक जमा कर लिया। याचिका में कहा गया है कि यहा निर्मित होने वाली कपड़े की डोर, जिसे माजा कहा जाता है, वह बाजारों में उपलब्ध तक नहीं है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि बच्चों के दुर्घटनाओं के खतरों को भापते हुए हाईकोर्ट इस डोर की बिक्री और स्टॉक पर पाबंदी लगाने के निर्देश जारी करे। 3 फरवरी को हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया।

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