राष्ट्र की ताकत को नष्ट करने के आरोप में दस वर्ष की कैद

चीन की एक अदालत ने अपनी लेखनी से जनाधिकारों की वकालत करने वाले लेखक को राष्ट्र की ताकत को नष्ट करने के आरोप में दस वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। पिछले एक माह में इस तरह के आरोपों में सजा पाने यह लेखक तीसरे व्यक्ति हैं।

मध्य चीन के वुहान की अदालत ने 52 वर्षीय लेखक लि तिए के खिलाफ पिछले वर्ष ही मुकदमा चलाया था। 17 जनवरी को राष्ट्र की शक्तियों को नष्ट करने का उन्हें दोषी ठहराया गया।

तिए के एक परिजन ने बताया कि लेखक ने अदालत में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि मैं दोषी नहीं हूं। मैंने कब राष्ट्र की शक्तियों का का नाश किया? तिए के परिजन ने कहा यह सब कुछ समझ पाना बहुत मुश्किल है। इन परिस्थितियों में आप बेबस हैं। लेकिन हमारी यही सचाई है।

तिए को उन 13 लेखों के लिए दोषी ठहराया गया है जिनमें उन्होंने जनता के अधिकारों की वकालत की थी। यह लेख अन्य देशों के अखबारों में तथा इंटरनेट पर प्रकाशित हुए थे। इस लेख का शीर्षक था, ‘मनुष्य की गरिमा स्वर्ग के समान है’।

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