प्रतिदिन बिना मिलावट के 100 लीटर दूध पहुँचाने की अनोखी सजा

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milk vanदिल्ली हाई कोर्ट ने मारपीट, महिलाओं से अभद्र हरकत और चाकू मारने के आरोपी दूध कारोबारियों को अनोखा आदेश सुनाया है। अदालत ने कहा है कि वे 15 दिन तक रोजाना 100 लीटर दूध बेसहारा बच्चों और महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था निर्मल छाया को मुफ्त पहुंचाएं और ध्यान रखें, इसमें कोई मिलावट नहीं होनी चाहिए।

नवभारत टाईम्स में राजेश चौधरी की रिपोर्ट है कि यह मामला पिछले साल 22 नवंबर को दूध का टेम्पो खड़ा करने को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। शिकायती ने रूप नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई कि दूध का कारोबार करने वालों ने अपना टेम्पो उनके घर के सामने खड़ा कर दिया था। जब उनकी बुजुर्ग दादी ने ऐतराज किया तो वे झगड़ने लगे। टेम्पो वालों ने अपने रिश्तेदारों को भी बुला लिया। उन्होंने शिकायत की कि दादी और आंटी के साथ अभद्र हरकतें कीं और शिकायती को चाकू मारकर जख्मी कर दिया।

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। कुछ लोगों के बीच बचाव से दोनों पक्षों में समझौता हो गया।

लेकिन खतरनाक हथियार से घायल करने (आईपीसी की धारा 324) के आरोप में मामला दर्ज होने के कारण समझौते के लिए कोर्ट की इजाजत जरूरी थी। आरोपियों ने अर्जी दी तो सरकारी वकील नवीन शर्मा ने उन पर हर्जाना लगाने की मांग की। जस्टिस सुरेश कैत ने एफआईआर रद्द करने का आदेश तो दिया, लेकिन साथ ही आरोपियों को निर्मल छाया में 15 दिन तक रोजाना 100 लीटर दूध पहुंचाने का निर्देश दिया।

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