जज बना दें, पर योग्य व्यक्ति तो मिले

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने जजों की कमी स्वीकारते हुए कहा है कि ऐसे योग्य आदमी नहीं मिल रहे हैं जिन्हें जज बनाया जा सके। उन्होंने इंडियन ज्यूडिशियल विजन 2022 विषय पर ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की दो दिवसीय ऑल इंडिया जज कॉन्फ्रेंस के 21 जनवरी को शुभारंभ अवसर पर जयपुर में यह बात कही।

21 जनवरी को बिड़ला ऑडिटोरियम में शुरू हुई कॉन्फ्रेंस में अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अफसरों की 28 से 30 साल लंबी सेवा के बाद भी हाईकोर्ट जज पद पर नहीं पहुंच पाने की पीड़ा उजागर हुई।

बिहार हाईकोर्ट के रिटायर जज राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि मुंसिफ से आने वाले अफसरों के कोटे को चालीस प्रतिशत से घटाकर तीस प्रतिशत कर दिया है। अधीनस्थ अदालतें अस्सी फीसदी आबादी को न्याय देती हैं, ऐसे में इनके अफसरों को भी न्याय मिलना चाहिए।

उत्तर प्रदेश से आए एडीजे वीपी सिंह ने कहा कि यही हाल रहा तो 2022 में कोई भी न्यायिक अफसर हाईकोर्ट न्यायाधीश के पद पर नहीं पहुंच पाएगा।

इस मौके पर राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में पेपर लैस कोर्ट के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने प्रदेश में अदालतों की संख्या कम बताते हुए और अदालतें खोलने की जरूरत बताई।

साथ ही उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे निर्णय होने के बाद ही उसे प्रकाशित करें और कोर्ट की टिप्पणियों को देने से बचें।

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