सहजधारी सिखों को वोट डालने का अधिकार

justiceपंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में केंद्र सरकार द्वारा 8 अक्टूबर, 2003 को जारी उस अधिसूचना को रद कर दिया, जिसके तहत  सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) चुनावों में सहजधारी सिखों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया था। न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश एम जयापॉल और न्यायाधीश एमएमएस बेदी की पूर्ण पीठ ने सहजधारी सिख फेडरेशन द्वारा अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर 20 दिसंबर को फैसला सुनाया। फेडरेशन ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2003 में जारी अधिसूचना को रद करने की मांग की थी।

पूर्ण पीठ ने याचिका पर 128 पन्नों में दिए अपने फैसले में साफ कहा है कि 8 अक्टूबर, 2003 को जारी अधिसूचना पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 (The Punjab Reorganisation Act 1966) की धारा-72 के प्रावधानों की शर्तो को पूरा नहीं करती। इसके अलावा सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 (The Sikkh Gurudwara Act 1925) की धारा-49 और 92 के तहत एसजीपीसी चुनाव में मतदाताओं की जो योग्यता तय की गई है, उसमें बदलाव मात्र अधिसूचना के आधार पर नहीं किया जा सकता। मतदाताओं की योग्यता से संबंधित ये धाराएं एक्ट का अभिन्न हिस्सा हैं।

पूर्ण पीठ ने कहा कि केंद्र ने यह अधिसूचना पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 की धारा-72 के सब सेक्शन 2 के तहत की है, जबकि सेंट्रल एक्ट, स्टेट एक्ट व प्रोविंशियल एक्ट को संशोधित नहीं किया जा सकता। इस एक्ट को विधायिका उचित व तय प्रावधानों के तहत ही संशोधित कर सकती है। मात्र विधायिका की शक्तियों को हस्तांतरित कर इस एक्ट में बदलाव नहीं किया जा सकता। केंद्र ने अधिसूचना जारी कर जिस तरह सहजधारी सिखों को मताधिकार से वंचित कर दिया, वह पंजाब री-आर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 की धारा-72 द्वारा तय प्रावधानों को संतुष्ट नहीं करती है। पूर्ण पीठ ने कहा कि सहजधारी सिख फेडरेशन द्वारा अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार किया जाता है व केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को रद किया जाता है।

पूर्ण पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में सिखों की कोई परिभाषा नहीं दी है कि कौन सिख है व कौन सिख नहीं है। पूरा फैसला सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 व पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 के प्रावधानों के तहत वर्ष 2003 में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना की वैधता व अवैधता पर दिया गया है। इस अधिसूचना पर केंद्र, गुरुद्वारा चुनाव आयोग, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, पंजाब व हरियाणा सरकार एवं सहजधारी सिख फेडरेशन के पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि अधिसूचना तय प्रावधानों के तहत नहीं हुई है।

20 दिसंबर को हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि अधिसूचना को खारिज करने के बाद विधायिका चाहे तो सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 की धारा-45 व 92 के तहत संशोधन कर सकती है। साथ ही हाई कोर्ट के फैसले के बाद आगे की कार्रवाई विधायिका पर छोड़ दी गई है।

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