बच्चे का हित ज्यादा महत्वपूर्ण, ना कि माता-पिता के अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

childसुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि बच्चे के संरक्षण हेतु पति पत्नी के बीच विवाद को निपटाते हुए कोर्टों को बच्चे के हित को सबसे ज्यादा अहमियत देनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एक हालिया फैसले में कहा कि बच्चे के संरक्षण से जुडे़ मामलों में कानून के तहत बच्चे का कल्याण और उसका हित सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, ना कि माता-पिता के अधिकार। कोर्ट ने यह बात तलाकशुदा दंपति के बीच अपनी दो बेटियों की कस्टडी को लेकर कानूनी जंग का फैसला करते हुए कही।

कोर्ट ने कहा कि गार्डियनशिप एंड वॉर्ड्स एक्ट 1890 (Guardians and Wards Act, 1890) और हिंदू माइनॉरिटी और गार्डियनशिप एक्ट 1956 (Hindu Minority and Guardianship Act, 1956) यह साफ करता है कि बच्चे का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है। बेंच ने कहा कि ऐसे मामले में जब माता पिता बच्चे की भलाई को बिना ध्यान में रखकर केस लड़ रहे हों तो कोर्ट को समझदारी दिखाते हुए बच्चे के हित के बारे में सोचना चाहिए।

इस मामले में बेंच ने 17 और 11 साल की लड़कियों से बात की और उनकी पसंद जानी कि वे किसके रहना चाहती हैं। लड़कियों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि दोनों बच्चियां पिता के साथ रहेंगी और मां बच्चों से सप्ताहांत पर मिल सकेंगी।

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