कानून के छात्रों को राहत, विवि को परीक्षा लेने का आदेश

examsबार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा तय से अधिक उम्र में प्रवेश लेने वाले कानून के छात्रों को राहत मिल गई है। हाई कोर्ट इंदौर ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को छात्रों को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है। 20 दिसंबर को छात्रों की 16 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा की एकलपीठ ने उक्त आदेश दिए।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा लागू रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन-2008 (Rules of Legal Education 2008) के खिलाफ इंदौर के वैष्णव लॉ इंस्टिट्यूट, एमबी खालसा लॉ कॉलेज, इंदौर इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ और आरसी जाल लॉ कॉलेज, महू के छात्रों ने याचिका दायर की थी। न्यायालय के आदेश से डेढ़ सौ अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

इस मामले में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अनुसूची 3 की धारा 28 के अंतर्गत इंटीग्रेटेड बेचलर ऑफ लॉ (Integrated Bachelor of Law ) डिग्री के लिए एल.एल.बी. के पांच वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम उम्र 20 वर्ष एवं तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए 30 वर्ष तय की है।

इंदौर में कई लॉ कॉलेजों में पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में 20 वर्ष से अधिक एवं तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए 30 वर्ष से अधिक उम्र के छात्रों को प्रवेश दे दिया है। अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने इन छात्रों की परीक्षा लेने से इंकार कर दिया है। इसके विरुद्ध छात्रों ने हाई कोर्ट का सहारा लिया।

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