देश के न्यायिक इतिहास की दुर्लभ घटना

राज्यसभा में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही 17 अगस्त को शुरू होगी। राज्यसभा में सीताराम येचुरी और प्रशांत चटर्जी (दोनों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) एवं अरूण जेटली (भारतीय जनता पार्टी) जस्टिस सेन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करेंगे।

न्यायाधीश के खिलाफ धनराशि की हेराफेरी एवं तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगाए गए हैं। प्रस्ताव में राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाएगा कि वह न्यायाधीश सेन को न्यायाधीश के पद से हटा दें। महाभियोग का विषय राज्यसभा की 17 अगस्त कार्यसूची में दर्ज है तथा इस पर प्रश्नकाल के बाद निर्णय लिया जाना है। विपक्ष के नेता अरूण जेटली के अनुसार सरकार से यह सहमति बनी है कि महाभियोग की कार्यवाही अपराह्न तीन बजे शुरू होगी।

नियमानुसार महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में एक ही सत्र के दौरान पारित होना चाहिए। ऎसा नहीं होने पर पूरी कार्यवाही निरस्त मानी जाती है। यह प्रस्ताव अगले सप्ताह लोकसभा में लाए जाने की संभावना है। इस बीच कांग्रेस और भाजपा ने महाभियोग की कार्यवाही के मद्देनजर अपने सदस्यों को सदन में मौजूद होने का व्हिप जारी किया है।

खबरों के अनुसार जस्टिस सेन सदन में बनाए गए एक कठघरे में पेश होंगे तथा उन्हें आरोपों के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। बाद में सदन इस प्रस्ताव पर चर्चा करेगा। राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने जस्टिस सेन के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति के सदस्यों उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी, पंजाब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुकुल मुद्गल और विधिवेत्ता फली नरीमन ने अपनी जांच में न्यायाधीश सेन को आरोपों में दोषी ठहराया था।

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