वरिष्ठता की अनदेखी के शिकार 20 चीफ जस्टिस

विधि मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद एक आरटीआई आवेदन के जवाब में इस सूचना का खुलाया किया है। मंत्रालय ने आरटीआई कार्यकर्ता एस सी अग्रवाल को 2005 से उच्च न्यायालयों के ऐसे 20 न्यायाधीशों के नामों की सूची सौंपी है जिनकी वरिष्ठता की पदोन्नति से पहले अनदेखी की गई।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच एल गोखले की वरिष्ठता की इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहने के दौरान तीन वर्षों में सात बार अनदेखी की गई और 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति से पहले उनका मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर तबादला कर दिया गया था।

मंत्रालय ने इससे पहले सूचना का खुलासा करने से इंकार कर दिया था। उसने कहा था कि उसके पास उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की ऐसी कोई सूची नहीं है जिसमें न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति से पहले उनकी वरिष्ठता की अनदेखी की गई।

मंत्रालय की सूची में न्यायमूर्ति डी के जैन, न्यायमूर्ति मार्कंडेय काट्जू, न्यायमूर्ति वी एस सिरपुरकर, न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी, न्यायमूर्ति एम के शर्मा, न्यायमूर्ति ए के पटनायक, न्यायमूर्ति सीरियक जोसफ , न्यायमूर्ति जे एम पांचाल, न्यायमूर्ति ए के गांगुली, न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार, न्यायमूर्ति एच एल दत्तू, न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा, न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति बी एस चौहान, न्यायमूर्ति के पी एस राधाक ृष्णन, न्यायमूर्ति ए आर दवे और न्यायमूर्ति सी के प्रसाद का नाम शामिल है।

मंत्रालय की सूची में न्यायमूर्ति ए के पटनायक भी हैं जिनकी 2007-09 के बीच पांच बार अनदेखी की गई। इसके अलावा न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की वरिष्ठता की पांच बार अनदेखी की गई। विधि मंत्रालय ने ऐसे चार न्यायाधीशों के नाम का भी खुलासा किया है जिनकी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति संबंधी फाइल को राष्ट्रपति ने कम से कम एक बार वापस किया।

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4 thoughts on “वरिष्ठता की अनदेखी के शिकार 20 चीफ जस्टिस”

  1. वक्त आ गया है कि अब भारतीय न्यायपालिका की भी साफ़ सफ़ाई की जानी चाहिए और अब जजेस जवाबदेही बिल तथा अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का गठन किया जाना चाहिए । सबसे जरूरी है पारदर्शिता का आना ..जनता जाग रही है अब बहरों और अंधों को भी जगा देगी देखिएगा । बहुत ही आंख खोलने वाली पोस्ट है । शुक्रिया इसे साझा कर रहा हूं

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  2. अन्ना हजारे ही इलाज हे इम सब बिमारियो का, हम सब को साथ देना चाहिये अन्ना जी का, जय हिन्द

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  3. भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.

    बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें

    आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

    महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

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  4. देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
    मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

    मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
    आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

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