होना पड़ेगा वकीलों को भी हाईटेक

ब वकीलों को भी  अदालत से तादात्म्य स्थापित रखना है तो हाईटेक होना होगा, किसी भी केस में वकालतनामा दाखिल करने के साथ-साथ अपना ई-मेल पता भी उसमें लिखकर देना होगा ताकि कोई भी सूचना या मांगा गया दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजा जा सके। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के निर्देशानुसार रजिस्ट्रार जनरल राकेश कपूर ने कड़कड़डूमा कोर्ट, तीस हजारी, पटियाला हाउस, रोहिणी, द्वारका और साकेत कोर्ट में काम करने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ई-मेल पता उन्हीं वकीलों को देना होगा, जिनका ई-मेल एकाउंट है। यह बाध्यता नहीं है, मगर ऐसा करने से वकीलों को अधिक से अधिक फायदा जरूर होगा। 
ई बार समन एवं आदेश वकीलों तक नहीं पहंुच पाते। ऐसे में ई-मेल के जरिये वकीलों तक केस के संबंध में कोई भी संदेश भेजना आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त कोई वकील किसी फैसले की प्रति के लिए अदालत में आवेदन करता है तो उसे फैसले की प्रति ई-मेल के जरिए भेज दी जाएगी। वकील इसके लिए भागदौड़ से बच जाएगा। हाईकोर्ट ने सर्कुलर के माध्यम से राजधानी के सभी न्यायिक अधिकारियों को यह भी निर्देश जारी किया है कि अगर कोई वकील आपराधिक मामले में किसी व्यक्ति की पैरवी के लिए वकालतनामा दाखिल करता है तो उसको अदालत के समक्ष यह भी विवरण देना होगा कि आरोपी पर उस तरह के अपराध में कितनी अदालतों में केस चल रहा है। इससे अदालतों को रिकार्ड व्यवस्थित करने में वकीलों से मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाईकोट राजधानी की सभी जिला अदालतों के कार्यो व प्रक्रिया को अधिक से अधिक हाईटेक करने की प्रक्रिया चला जा रहा है। इसके तहत जिला अदालतों के रिकार्ड को कम्प्यूटरीकृत किया जा चुका है।
देखने की बात यह है कि राजधानी से चली ये बयार देश के कोने कोने तक कब पहुँचती है?
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3 thoughts on “होना पड़ेगा वकीलों को भी हाईटेक”

  1. कंप्यूटर युग में सभी को कंप्यूटर लिट्रेट होना ही चाहिए । अच्छा प्रस्ताव है ।

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  2. निश्चय ही ये ‘आज’ की मांग है। हम उन दिनों को याद करें जबकि सुप्रीम कोर्ट के नर्णय की जानकारी होने में वकीलों को महिनों का समय लग जाता था लेकिन आज हमें निर्णयों की जानकारी उसी दिन हो जाती है। ये सब संभव हुआ है इन्टरनेट के कारण। वकीलों की कम्यूंटर एवं इन्टरनेट में दक्षता निश्चय ही मुकदमों के निस्तारण में होने वाले अतार्किक विलम्ब में कमी करेंगी।

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  3. दिल्ली हाईकोर्ट ने यह बहुत अच्छा किया है.आज संचार माध्यमों द्वारा सभी अदालतों को सुसज्जित करना ही समय की मांग है.दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उठाया यह कदम प्रशंसा योग्य है.अगर संभव हो तो दोनों पक्षों का भी ईमेल उनकी इच्छा पर लिया जाये और फैसले या आदेश की एक प्रति शुल्क जमा करने पर उससे भी भेज दी जाये तो इससे वकीलों द्वारा अपने मुक्किवल से आदेश की प्रति के नाम पर काफी ज्यादा ली जाती राशी का वचाव होगा और भ्रष्टाचार पर भी रोक लग जाएगी.

    इन्टरनेट या अन्य सोफ्टवेयर में हिंदी की टाइपिंग कैसे करें और हिंदी में ईमेल कैसे भेजें जाने हेतु मेरा ब्लॉग http://rksirfiraa.blogspot.कॉम & http://sirfiraa.blogspot.com देखें. अच्छी या बुरी टिप्पणियाँ आप करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे.अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें.
    # निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन: 09868262751, 09910350461 email: sirfiraa@gmail.com, महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.

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