विधि शिक्षा को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय आयोग

भारत में विधि शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए विधि मंत्रालय एक राष्ट्रीय आयोग बनाने की योजना पर काम कर रहा है। यह काम अब तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया करता था। मंत्रालय ने इसके लिए उच्च विधि शिक्षा और शोध विधेयक, 2010 (हायर लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च बिल) तैयार किया है, जिसके तहत विधि शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करने के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाने की बात है।

इस विधेयक के तहत विधि संबंधी उच्च शिक्षा और शोध के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करने और नए विधि शिक्षा संस्थानों और कॉलेजों को मान्यता देने की बात है। मंत्रालय ने यह विधेयक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल कमीशन फॉर हायर एजुकेशन एंड रिसर्च बिल को ध्यान में रखते हुए बनाया है, जिसके तहत विधि शिक्षा समेत सभी प्रकार की उच्च शिक्षा को एकल नियंत्रक निकाय के तहत लाने की बात हो रही थी।

विधेयक के तहत मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय आयोग बनाने की बात कही है, जिसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। इनकी नियुक्ति की अनुशंसा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बनने वाली एक चयन समिति करेगी। चयन समिति के अन्य सदस्यों के तौर पर एटॉर्नी जनरल, प्रधान न्यायाधीश और विधि मंत्री को शामिल किया जाएगा।

विधेयक के एक प्रावधान में कहा गया है कि आम परिषद आयोग को सलाह देगी कि उच्च शिक्षा और शोध को पेशेवर अभ्यास से कैसे जोड़ा जा सकता है। वर्ष 1961 के एडवोकेट्स अधिनियम में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यो के तौर पर विधि शिक्षा का प्रचार और इसके मानक बनाए रखना परिभाषित किया गया है

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2 thoughts on “विधि शिक्षा को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय आयोग”

  1. Amiable dispatch and this fill someone in on helped me alot in my college assignement. Thanks you for your information.

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  2. देश में विधि शिक्षा नाम मात्र की है और न ही उसकी कोई आवश्यकता लगती | अधिकाँश वकील और न्यायाधीश न तो कानून पढते हैं और न ही उसका अनुसरण करते हैं वे मात्र परम्पराओं और परिपाटियों का अनुसरण करते हैं| कोई वकील या न्यायाधीश कोई प्रक्रिया इसलिए अपना रहा होता है कि ऐसी प्रक्रिया उनका साथी या वरिष्ठ अपना रहा है | यद्यपि वकीलों और न्यायाधीशों ने उर्दू की विधिवत शिक्षा ग्रहण नहीं की होती है फिर भी वे अपने कार्यों में उर्दू शब्दों का ही प्रयोग करते हैं क्योंकि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही नहीं आती हैं| विधि के क्षेत्र में एक दो विश्वविद्यालयों को छोड़कर कोई अनुसंधान भी नहीं हो रहा है|

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