हाईकोर्ट राठौर के साथ सामान्य व्यवहार नहीं कर सकता

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को दो निचली अदालतों ने एक घिनौने अपराध में दोषी माना है और उन्हें सामान्य अपराधियों की तरह इस आधार पर जमानत देना उचित नहीं कि अपील की सुनवाई में समय लगेगा। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे में आरोपी के अधिकारों को देखते हुए मुख्य अपील पर ही तेजी से सुनवाई का फैसला लिया जा रहा है। हाईकोर्ट रजिस्ट्री केस को सीरियल नंबर 301 पर योग्य बेंच के समक्ष 29 जून को सुनवाई पर लगाए।
रुचिका छेड़छाड़ मामले में दोषी एसपीएस राठौर को उस की सजा पर रोक और जेल से जमानत पर रिहाई के मामले में हाईकोर्ट ने तत्काल कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है। लेकिन न्यायमूर्ति अजय तिवारी ने सजा के खिलाफ रिविजन पिटिशन की सुनवाई को तेजी से करने के निर्देश देते हुए विशेष संदेशवाहक के जरिए केस का सारा रिकार्ड हाईकोर्ट में समन कर लिया है।
अदालत ने हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि गर्मियों की छुट्टियों के तुरंत बाद 29 जून को रोस्टर के मुताबिक योग्य पीठ के समक्ष केस को सुनवाई के लिए लगाया जाए। इसके साथ ही राठौर को अब कम से कम एक माह से ज्यादा समय जेल में बिताना ही होगा। राठौर 25 मई से बुड़ैल जेल में बंद है।
15 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में अदालत ने सजा पर रोक लगाए जाने के मामले पर 29 जून के लिए ही सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि यदि तय दिन को मामले पर किन्हीं कारणों से सुनवाई न हो सके तो याची जमानत पर रिहा किए जाने की अपनी दलील को अदालत के समक्ष रख सकता है। फैसले में कहा गया कि सामान्य परिस्थितियों में जहां सजा तीन साल से कम हो वहां अपील अथवा रिविजन पिटिशन पर लंबे समय तक सुनवाई को देखते हुए जमानत का लाभ दे दिया जाता है।
राठौर की वकील पत्नी आभा राठौर ने फैसले के बाद अदालत से आग्रह किया था कि उनके पति की मेडिकल परिस्थितियों पर गौर किया जाए। फैसले में इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा गया है।
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One thought on “हाईकोर्ट राठौर के साथ सामान्य व्यवहार नहीं कर सकता”

  1. ओह !तो जेल में रहना ही पड़ेगा । इसे कहते हैं न्याय। न्याय में देरी भी नहीं होनी चाहिए ।

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