भोपाल गैस त्रासदी के अपराधियों को 23 साल दो-दो साल की जेल और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा

भोपाल गैस त्रासदी के आठ अपराधियों को 23 साल तक चली सुनवाई के दौरान 178 लोगों की गवाही  लेने और तीन हज़ार से ज्यादा पन्नों दस्तावेजों की खाक छानने के बाद भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दो-दो साल की जेल और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों में  यूनियन कारबाइड इंडिया के हेड केशब महेंद्रा समेत विजय गोखले, किशोर कामदार, जे मुकुंद, एसपी चौधरी, केवी शेट्टी और एसआई कुरैशी शामिल हैं।  
अदालत ने माना कि इन लोगों की लापरवाही के चलते ही गैस कांड जैसा विनाशकारी हादसा हुआ।  अभियोजन पक्ष का कहना है कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के प्लांट के डिजायन में भारी कमियां थीं, दुर्घटना इसी के चलते हुई।  हादसे से दो साल पहले अमेरिकी विशेषज्ञों की एक टीम ने सुरक्षा संबंधी कई कमियां बताई थीं लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी लापरवाही और अनदेखी की वजह से दो दिसबंर 1984 की रात भोपाल गैस हादसा हुआ। 
यूनियन कारबाइड इंडिया लिमिटेड के खाद बनाने वाले कारखाने से रात में 40 मीट्रिक टन जहरीली  टॉक्सिक मेथाइल आइसोसाइनड गैस रिसी, जिस ने रातों रात हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया। हादसे की चपेट में आए एक लाख से ज्यादा लोग आज भी कई तरह की अशक्तताओं और बीमारियों से लड़ रहे है।
सरकार के मुताबिक हादसे में 3,500 लोगों की और राहत व बचावकर्मियों के मुताबिक गैस कांड में 25 हजार जानें गईं. कई पीड़ित आज भी मानवाधिकार संगठनों के साथ मिलकर राजधानी नई दिल्ली में इंसाफ के लिए आंदोलनरत हैं।
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