भारतीय अदालत के वारंट की एक विदेशी के लिए हैसियत

भारतीय अदालत से जारी वारंट की हैसियत सिर्फ इतनी सी है कि विश्व की सबसे भयावह औद्योगिक घटना भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड कंपनी के फरार चेयरमैन वॉरेन एंडरसन खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई किए जाने की मांग को अमरीका ने सिरे से खारिज कर दिया है। दिसंबर 1984 में हुई इस त्रासदी में 15 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हजारों प्रभावित हुए थे।
वॉरेन एंडरसन भले ही भारत से फरार हो, लेकिन वह आज भी अमरीका में आजाद घूम रहा है। न्यूयार्क में वह आराम से जिंदगी गुजार रहा है। एंडरसन पर आरोप था कि लागत कम करने के लिए उसने सुरक्षा के इंतजामों में कटौती की। इस गैसकांड के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे सिर्फ 25 हजार रूपए के मुचलके पर जमानत मिल गई थी। इसके बाद वह भारत छो़ड अमरीका भाग गया था। भोपाल गैस त्रासदी और अदालत के फैसले से जु़डे एक सवाल के जवाब में ब्लैक ने कहा कि यह आंतरिक मामला है।
अमरीका ने उम्मीद जताई है कि भोपाल गैस त्रासदी के सिलसिले में आया भारतीय अदालत का फैसला इस दुर्घटना के शिकार लोगों के हित में होगा। अमरीका के उप विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लैक ने कहा, भोपाल गैस कांड इतिहास का सबसे ब़डा औद्योगिक हादसा था, लेकिन मुझे नहीं लगता कि फैसले के बाद कोई नई जांच शुरू होगी। हमें उम्मीद है कि इस फैसले के बाद पीडितों और उनके परिवारों के लिए मामला खत्म होगा।
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3 thoughts on “भारतीय अदालत के वारंट की एक विदेशी के लिए हैसियत”

  1. दो कौडी के हम दो कौडी का वारट।
    उसे विदेश लौटने की इजाज़त क्यु दी गई? ये एक
    बडा सवाल है पर कौन पूछे और किससे…पूछ्नेवाले को अपने नाम वारंट थोडे न चाहिये???

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  2. उस वारंट की अहमियत तब होती जब हम हिन्दुस्तानियों में आत्मसम्मान होता लेकिन वो तो हम बहुत पहले गिरवी रख चुके !

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  3. आईये जानें ….मानव धर्म क्या है।

    आचार्य जी

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