पुलिस प्रशासन की लापरवाही से सिख विरोधी दंगों के आरोपी बरी हुए

बिहार के रोहतास जिले में 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में स्थानीय अदालत ने 27 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सोमवार को इन आरोपियों को बरी किया। मामले में चार पुलिस कर्मी गवाह थे। बार-बार समन भेजने के बावजूद भी कोई गवाह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने ढिलाई के लिए पुलिस प्रशासन को भी फटकार लगाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश [तृतीय] नंद किशोर शर्मा ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। गवाहों की उपस्थिति को लेकर कोर्ट ने एसपी कार्यालय और राज्य अपराध विभाग को कई बार समन भेजा था। लेकिन इसके बावजूद गवाह पुलिसकर्मी कोर्ट में पेश नही हुए। ज्ञातव्य है कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में कई जगहों पर सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। जिले के डेहरी-आन-सोन में सिनेमा रोड स्थित झाबरमल गली में दंगाइयों ने कई दुकानों में आग लगा दी थी। पुलिस ने घटना में 61 लोगों को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन प्रभारी अधिकारी के. झा की गवाही के आधार पर इन आरोपियों के खिलाफ डेहरी-आन-सोन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 28 फरवरी 1985 को इन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले में 30 जून 2006 को 61 में से 28 आरोपियों के खिलाफ अंतिम चार्जशीट दाखिल करने के बाद कोर्ट में विचारण शुरू हुआ था।
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