तलाक होगा कुछ और आसान

अगर ये साबित कर दिया जाए कि शादीशुदा जीवन अब नर्क बन गया है औऱ उस का टूटना ही बेहतर है तो शादी का रिश्ता ढोना नहीं पड़ेगा। हिन्दू विवाह कानून में इस तरह के संशोधन किए जाने को मंत्रीमंडल ने मंजूरी दे दी है।
हालांकि, ऐसे रिश्तों से छुटकारा पाने की जरूरत 32 साल पहले ही महसूस कर ली गई थी। 1978 में विधि आयोग की 71वीं रिपोर्ट में ही हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 में संशोधन करने की सिफारिश कर दी गई थी लेकिन उसे कानूनी जामा पहनाने की पहल में तीन दशक से ज्यादा का समय बीत गया। इस बीच सुप्रीमकोर्ट के कई फैसलों और गत वर्ष विधि आयोग की 217वीं रिपोर्ट में फिर इसे तलाक का 10वां आधार बनाए जाने की सिफारिश हुई। इससे अदालतों में लंबित तलाक के मुकदमे जल्दी निपटेंगे। उन्हें सिर्फ सिद्ध करना होगा कि वे वर्षों से अपने साथी से अलग रह रहे हैं और उनका एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है। अब दोबारा साथ रहना मुमकिन नहीं है।
विवाह कानून [संशोधन] विधेयक, 2010 में हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 व विशेष विवाह अधिनियम, 1954 में उपरोक्त संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। अभी तक वर्षों से अलग अलग रहना और संबंध के दोबारा न जुड़ सकने की संभावना तलाक का आधार नहीं थे और इसलिए देश में हजारों जोड़े वस्तुत: अलग रहते हुए अपने वैवाहिक संबंधों को ढोने को मजबूर थे। सरकार ने कानून में संशोधन का जो प्रस्ताव पेश किया है उसमें हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी व विशेष विवाह अधिनियम की धारा 28 के तहत अगर पति पत्नी आपसी सहमति से तलाक की अर्जी देते हैं और अर्जी देने के बाद एक पक्ष जानबूझ कर अदालती कार्यवाही से बचता है और पेश नहीं होता तो अदालत उस अर्जी पर तलाक दे सकती है। इस संशोधन से एक पक्ष दूसरे पक्ष को बेवजह प्रताड़ित नहीं कर पाएगा।
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यहाँ आने के लिए इन मामलों की हुई तलाश:
  • हिन्दू तलाक कानून 2017

4 thoughts on “तलाक होगा कुछ और आसान”

  1. महत्वपूर्ण पोस्ट, साधुवाद

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  2. वाह बहुत सुन्दर लिखा है।

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  3. महत्त्वपूर्ण जानकारी ।
    काम न आये तो अच्छा ।

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