खाप पंचायतों की याचिका सुप्रीम कोर्ट से निरस्त

हिंदू विवाह अधिनियम में बदलाव की मांग कर रही खाप पंचायतों को सोमवार को उस समय करारा झटका लगा, जब सर्वोच्च न्यायालय ने इसके लिए दायर जनहित याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया।सुप्रीम कोर्ट ने इसे पेचिदा मामला करार देते हुए कहा कि याचिका की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का है और यदि वादी चाहे तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। न्यायमूर्ति दीपक वर्मा व केएस राधाकृष्णन की दो सदस्यीय अवकाश पीठ ने यह बात सिवाना (झज्जर निवासी) नरेश कादियान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।
इससे पहले याचिका पर दलील देते हुए याची द्वारा पेश वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने एक गोत्र में विवाह को गैर-कानूनी घोषित करने के लिए अदालत से हिंदू विवाह अधिनियम 1955 में संशोधन की मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा ही नहीं समूचे उत्तर भारत में खाप पंचायतों ने इस मसले को सामाजिक स्तर पर भी बड़े पैमाने पर उठाया है।
उन्होंने दलील दी कि इस मुद्दे पर कई बार खापों ने भी फैसले लिए हैं। मामले को गंभीर करार देते हुए उन्होंने कहा कि इस सामाजिक समस्या के चलते आए दिन युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। एक गोत्र में विवाह को पारंपरिक, ऐतिहासिक, नैतिक एवं वैज्ञानिक रूप से गलत करार देते हुए तुलसी ने कहा कि एक गोत्र में विवाह करने वाले युवा परंपरा के तहत भाई-बहन होने के कारण पति-पत्नी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि पशुओं में भी इस तरह के प्रजनन को वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाता।
वरिष्ठ अधिवक्ता तुलसी की दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि यह एक पेचीदा मसला है और इसकी सुनवाई का अधिकार क्षेत्र पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का है। यदि वादी चाहे तो हाईकोर्ट में इस मसले पर अपनी याचिका दायर कर सकता है। समूचे उत्तरी भारत विशेषकर हरियाणा में खाप पंचायतों द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम में बदलाव की मांग को देखते हुए इस संबंध में जल्दी ही एक नई याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर किए जाने की जा सकती है।
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2 thoughts on “खाप पंचायतों की याचिका सुप्रीम कोर्ट से निरस्त”

  1. बेशक यह एक बेहद पेचीदा और गंभीर मामला है । सामाजिक नियमों को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता । इस विषय में दूसरे क्षेत्र या समुदाय के लोगों को विरोध नहीं करना चाहए ।

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  2. अंधविश्वासों पर आधारित रूढ़ियाँ और कितने इंसानों की बलि लेंगी?

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