32 लाख देने के समझौते पर सुप्रीम कोर्ट ने डाक्टर के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा खारिज किया

अपने विरुद्ध दुष्कर्म का झूठा आरोप लगा कर ब्लेक मेल करने का आरोप लगाने वाला डाक्टर अब उसी नर्स को  32 लाख रुपए देने को राजी हो गया है।  सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए गाजियाबाद के डाक्टर प्रदीप गुप्ता के खिलाफ दायर बलात्कार के केस को खारिज करने का निश्चय किया है। बलात्कार की शिकार नर्स और डाक्टर के बीच इस आशय का समझौता हो गया है। इस मामले में डाक्टर प्रदीप गुप्ता पर अपने ही अस्पताल के नर्स के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा, फिर ब्लैकमेल करने के दावे हुए, कृत्रिम वीर्यारोपण [इंसेमिनेशन], किराए की कोख [सरोगेसी] जैसी कहानियाँ गढ़ी गईँ और आखिर में दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
न्यायाधीश अल्तमास कबीर और न्यायमूर्ति एचएल गोखले की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि बलात्कार एक अक्षम्य अपराध है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदान की गई विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालत बलात्कार की शिकार महिला द्वारा पैदा किए गए बच्चे के हित में यह फैसला कर रही है। डाक्टर के खिलाफ दुष्कर्म केस खारिज कर रही है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केस के तथ्यों को पूरा सम्मान करते हुए और दुष्कर्म पीड़ित द्वारा पैदा किए गए बच्चे के हितों का ध्यान रखते हुए हम इस बात से संतुष्ट है कि यह ऐसा फिट केस है, जिसमें हम अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार है कि वह एक पार्टी को न्याय दिलाने के लिए कोई भी आदेश या दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 4 मार्च को गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के उस आदेश पर रोक लगा दिया था, जिसमें निचली अदालत ने इस मामले में डा. प्रदीप गुप्ता और दुष्कर्म पीड़ित के बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया था। ताकि पितृत्व का मामला तय किया जा सके।
पूर्व में डाक्टर गुप्ता ने आरोप लगाया था कि दुष्कर्म की शिकार नर्स ने उन्हें बलात्कार के मामले में फर्जी फंसा दिया है। डाक्टर के अनुसार, उनके वीर्य से किराए की कोख वाली मां [सरोगेट मदर] बनने के बाद उक्त नर्स ने उन्हें फर्जी फंसा दिया। जबकि नर्स ने उक्त वीर्य को दिलावर सिंह नामक शख्स से हासिल किया था। डाक्टर प्रदीप गुप्ता ने कहा था कि उन्होंने अपना वीर्य दिलावर सिंह को स्वैच्छिक रूप से दिया था, ताकि वह नर्स को सरोगेट मदर बनाकर एक बच्चा पैदा करा सके और पिता बनने का अपना सपना पूरा कर सके। डाक्टर के मुताबिक, सरोगेट मदर बनने के बाद उनके अस्पताल में काम करने वाली नर्स ने उनके खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दायर कर दिया। इस काम में उसकी कुछ असामाजिक तत्वों ने मदद की। प्रदीप गुप्ता का आरोप था कि नर्स ने यह सब उन्हें ब्लैकमेल करने और पैसा ऐंठने के लिए किया। बलात्कार की शिकार नर्स ने गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में डा. गुप्ता के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। जिसमें आरोप लगाया कि डा. गुप्ता उसके पेट में पल रहे बच्चे का गर्भपात कराने की कोशिश कर रहे हैं और इस काम में उनकी पत्‍‌नी डा. सीमा भी मदद कर रही हैं। नर्स की शिकायत पर साहिबाबाद पुलिस ने 20 अगस्त, 2007 को डा.गुप्ता के खिलाफ धारा 376डी और 313 के तहत मुकदमा कायम कर लिया। हालांकि पुलिस ने इस मामले में डाक्टर को एक तरह से पूरी तरह बरी करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। इसके बाद नर्स ने गाजियाबाद स्थित अदालत का दरवाजा खटखटाया। सीजेएम अदालत के निर्देश पर गाजियाबाद के एसएसपी ने डीएनए जांच का आदेश दिया। जिसके खिलाफ डा. गुप्ता ने हाई कोर्ट में दस्तक दी, लेकिन वहां उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। इस बीच दोनों पक्षों ने अपने वकीलों अरुप बनर्जी और आशा नायर की मदद से आपस में समझौता कर लिया।
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One thought on “32 लाख देने के समझौते पर सुप्रीम कोर्ट ने डाक्टर के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा खारिज किया”

  1. इस तरह का समझौता न्यायिक प्रक्रिया के समय की बर्बादी है ,पैसे से न्याय को नहीं तौला जाना चाहिए वो भी बलात्कार के मामले में |

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