3000 पोस्ट पूरे किए अदालत ब्लॉग ने: क्या यह हिन्दी ब्लॉगिंग में एक कीर्तिमान है!?

आज से लगभग ढ़ाई वर्ष पहले 6 नवम्बर 2007 को जब इस अदालत ब्लॉग की पहली पोस्ट लिखी गई थी तब यह अंदाज़ नहीं था कि इसे इतनी लोकप्रियता मिलेगी। तब से लेकर आज 21 मई 2010 की शाम तक, दो माह वालेअवकाश को छोड़ कर, 28 माह में 3000 पोस्टें हो चुकी हैं।

‘अदालत’ ब्लॉग का, हिन्दी ब्लॉगजगत में शायद यह भी एक रिकॉर्ड होगा कि किसी एक ही विषय पर आधारित ब्लॉग को एक ही व्यक्ति द्वारा ‘चलाया’ जा रहा है।

30 माह की समय-सीमा में 3000 लेख पूरे करने वाले इस ब्लॉग के कुछ मह्त्वपूर्ण पड़ाव इस प्रकार हैं:

अदालत की प्रथम पोस्ट
अदालत पर प्रथम टिप्पणी
अदालत का ब्लॉग जगत में प्रथम उल्लेख
अदालत की 500वीं पोस्ट
अदालत की पहली वर्षगाँठ
अदालत की दूसरी वर्षगाँठ
अदालत द्वारा एक वर्ष में 1200 पोस्ट
अदालत द्वारा 2000 पोस्ट
अदालत द्वारा विज्ञापनों के जरिये गूगल पर प्रचारप्रसार
अदालत का उल्लेख 25 से अधिक पत्रपत्रिकाओं में

ब्लॉगजगत के कुछ साथियों का उल्लेख आप इस पोस्ट पर देख सकते हैं

अब तक इस ‘अदालत’ ब्लॉग को 63 देशों के 296 शहरों/ कस्बों में, 11 तरह की कम्प्यूटर प्रणालियों पर, 14 ब्राऊज़र संस्करणों के सहारे, 16 अंतर्राष्ट्रीय भाषाई क्षेत्रों में लगभग 1 लाख व्यक्तियों द्वारा देखा जा चुका है। (रूपरेखा बदले जाने के दौरान कई बार संबंधित कोड लगाना छूट जाता है इसलिए, लगभग) ताजा आँकड़े बताते हैं कि इस ब्लॉग पर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति 17 मिनट 25 सेकेंड बिताता है

(16 अंतर्राष्ट्रीय भाषाई क्षेत्र/ 63 देश/ 296 शहर/ लगभग 1 लाख पाठक)

आँकड़े व संदेश यह भी बताते हैं कि इस ‘अदालत’ ब्लॉग को सामान्य पाठक के अतिरिक्त, नियमित तौर पर विधि के छात्र, वकील, जानीमानी हस्तियाँ, सामाजिक कार्यकर्ता, न्यायाधीश भी पढ़ते हैं।

इस अंतराल में आप सभी की सराहना, टिप्पणियाँ, शाबाशी, मार्गदर्शन, मांग, आलोचना और धमकी ने मेरे लिए उत्प्रेरक का कार्य किया है। जिसके चलते कुछ और बेहतर करने की ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा मैं, उन तमाम ब्लॉगर्स/ चिट्ठाकारों/ एग्रीगेटर्स/ वेबसाईट्स को धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने ‘अदालत’ का उल्लेख किया या लिंक लगायी या पसंद किया। समस्त टिप्पणीकर्तायों को, संजीवनी रूपी टिप्पणियों के लिए तो धन्यवाद शब्द नाकाफी होगा। किसी भी कार्य के मूल ऊर्जा स्त्रोत/ जनक को भूलना नादानी मानी जायेगी। विभिन्न व्यक्तियों, संस्थायों, समाचार-पत्रों, वेबसाईट्स का आभारी हूँ, जिनकी मूल खबरों/ जानकारियों की बदौलत यह ब्लॉग इस पड़ाव पर पहुँच सका है। दिनेशराय द्विवेदी जी का सक्रिय सहयोग, ‘अदालत’ पर मिल रहा है, उन्हें कैसे भूल सकता हूँ।

एक बार पुन: आप सभी जाने-अनजाने साथियों, पाठकों, स्नेहियों, शुभेच्छुयों का दिल से धन्यवाद।

अंत में भावुक होते हुए यही कहना चाहता हूँ कि अब विराम दिया जा रहा है इस अदालत ब्लॉग को। यदि संभव हो सका तो इस ब्लॉग की वापसी होगी।

आप सभी को मेरी टाटा बाय बाय…

लोकेश

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14 thoughts on “3000 पोस्ट पूरे किए अदालत ब्लॉग ने: क्या यह हिन्दी ब्लॉगिंग में एक कीर्तिमान है!?”

  1. बधाई बहुत बहुत बधाई .

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  2. बधाइयों के इस मौके पर यह टा टा बाय बाय कैसी? पहले ढेर सी बधाइयाँ तो लीजिए, इसे अनवरत रखिए। इस का बहुत महत्व है। पाठकों को निराश न करें।

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  3. शुभकामना स्वीकारिये

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  4. लख लख बधाइयाँ…मुबारकां…

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  5. बधाइयाँ जी ….शेष सब ठीक है ..बाय बाय समझ नही आई …

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  6. यह कीर्तिमान है या नहीं वह तो नहीं जानता लेकिन इतना जरूर जानता हूँ की आपका काम अत्यंत गंभीर,सार्थक और उम्दा जानकारी देने वाला रहा है / आप टा-टा बाय-बाय तो हमे कह ही नहीं सकते ,कहेंगे तो अभी लोकेश जी को कहकर मुकदमा ठोक देंगे,इसलिए ये टा-टा बाय-बाय वापस लीजिये /

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  7. निश्चय ही आप बधाई के हकदार है। आपके ब्लाग और आपके द्वारा पूर्व में विश्राम की घोषणा ने ही मुझे विधि सूचनाओं का ब्लाग प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी। मुझे आशा ही नहीं बल्कि विश्वाश है कि आप पुनः इस विश्राम को लम्बा नहीं खींच पायेगें। पुनः ब्लाग लिखने के लिए बधाई तथा बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

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  8. बधाई के साथ…

    ये चल कहाँ दिये..इतना बेहतरीन काम करने वालों को जाना तो अलाऊड कहाँ है जी…वापस आईये.

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  9. इस बड़े कीर्तिमान पर बधाई !
    जाना नाट एलाउड

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  10. I follow your blog regularly… Law is known to be a boring topic.. but you have made it interesting, thats not an easy thing to do… congrats to you…

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  11. लोकेश भाई, इस पड़ाव पर बधाई स्‍वीकार करें।

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  12. बधाई देने वाला काम कभि कभि कर लेना चाहिये
    आप्को बहुत बहूत बधाई 3000 पोस्त की

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  13. बधाइयों के इस मौके पर यह टा टा बाय बाय कैसी? पहले ढेर सी बधाइयाँ तो लीजिए, इसे अनवरत रखिए। इस का बहुत महत्व है। पाठकों को निराश न करें।

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