सह-अभियुक्त की गलती के कारण जमानत से इन्कार नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी अभियुक्त को उस के सह-अभियुक्त की किसी गलती के कारण किसी सुविधा से नहीं रोका जा सकता। इस के कारण उसे न तो जेल भेजा जा सकता है और न जमानत से ही इंकार किया जा सकता।

न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति सी.के.प्रसाद की अवकाशकालीन खण्डपीठ ने कहा, ”यदि अदालत सह-अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विफल हो जाती है तो इसका खामियाजा कोई दूसरा अभियुक्त क्यों भुगते?”
सिंघवी ने कहा, ”सच्चाई यह है किसह-अभियुक्त द्वारा दिखाए गए असहयोग के व्यवहार से आवेदक अभियुक्त को जमानत से इंकार की बात का समर्थन नहीं किया जा सकता।”
धोखाधड़ी के एक मामले में फरहत अली को जमानत जारी करते हुए अदालत ने इस सप्ताह के प्रारंभ में कहा कि वह 14 सितंबर, 2007 से जेल में है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि इस दौरान उसने मुकदमे की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा पहुंचाई हो। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका पर विचार करने से इंकार कर उचित काम नहीं किया है।
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One thought on “सह-अभियुक्त की गलती के कारण जमानत से इन्कार नहीं”

  1. क्या मुजरिम /मुलजिम इस फैसले का भी अनुचित लाभ उठा सकते हैं ?
    कृपया इस पर भी प्रकाश डालें।

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