बच्चों पर महिलाओं के बराबर हक का कानून शीघ्र

विधि और न्याय मंत्रालय दो कानूनों में संशोधन किए जाने पर गंभीरता से काम कर रहा है जिस से महिलाओं को बच्चों पर बराबरी का हक मिल सके। गार्जियंस एंड वार्डस एक्ट, 1890 में प्रस्तावित संशोधन के तहत पिता के साथ माता को भी नाबालिग बच्चे के लिए उपयुक्त अभिभावक घोषित किया जा सकेगा। इसके अलावा हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण कानून, 1956 में भी संशोधन किया जाएगा।

विधि मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने एक विशेषज्ञ समिति भी गठित की है। यह समिति ऐसे 40 कानूनों की पड़ताल करेगी जिनमें कि लिंग आधारित भेदभाव दिखता है। मोइली ने बताया कि यह लिंग भेद हटाने की दिशा में पहला कदम है। गार्जियंस एंड वार्डस एक्ट, 1890 में फिलहाल पिता को ही नाबालिग बच्चे का अभिभावक नियुक्त किए जाने के लिए उपयुक्त व्यक्ति माना गया है।
अब इसमें प्रस्तावित बदलाव विधि आयोग की 83वीं रिपोर्ट पर आधारित है। संशोधन बिल की समीक्षा संसदीय स्थाई समिति कर रही है। समिति ने इस पर आम जनता से 24 मई तक सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित संशोधन का कई कानूनविदों ने स्वागत किया है।
दूसरा संशोधन हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण कानून, 1956 की धारा 8 में होने वाला है। इसके तहत विवाहित महिला को किसी बच्चे को गोद लेने के लिए अक्षम बताने का प्रावधान हटाया जाएगा। इसी कानून की धारा 9 के तहत माता को पिता की तथा पिता को माता की सहमति के आधार पर अपने बच्चे को गोद देने का बराबर हक होगा।
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