प्रधान न्यायाधीश ने शपथ लेते ही प्रणाली में सुधार की शुरुआत की: मौखिक अनुरोध ठुकराया

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज एसएच कपाड़िया ने 11 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। गरीब परिवार में जन्म लेने और छोटी सी नौकरी से शुरुआत करने वाले जस्टिस कपाड़िया अब भारत के 38वें मुख्य न्यायाधीश हैं। अनुशासन पसंद न्यायमूर्ति कपाड़िया ने पद संभालते ही प्रणाली में सुधार की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

शपथ लेने के बाद जब कपाड़िया ने न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन व स्वतंत्र कुमार के साथ सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में प्रवेश किया तो वहां मौजूद भारत के अटार्नी जनरल जीई वाहनवती और सालीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने उनका स्वागत किया और बधाई दी। कोर्ट में मौजूद कुछ अन्य वकीलों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। न्यायमूर्ति कपाड़िया ने बधाई स्वीकार करते हुए धन्यवाद दिया।

इसके बाद जैसे ही एक वकील ने सूचीबद्ध मामलों पर सुनवाई शुरू होने से पहले, अपने मामले को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए जिक्र करना शुरू किया तो जस्टिस कपाड़िया ने वकील का अनुरोध ठुकरा दिया। अनुशासन पसंद कपाड़िया ने कहा कि वे मौखिक अनुरोध (ओरल मेंशनिंग) नहीं सुनेंगे वकील निर्धारित व्यवस्था के जरिए ही अपने मामलों की मेंशनिंग करें। वे मेंशनिंग रजिस्ट्रार के पास जाकर अपना मामला मेंशनिंग सूची में शामिल कराएं।

इससे पहले रोजाना मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने दसपंद्रह मिनट तक मौखिक अनुरोध चलता था, जिसमें मेंशनिंग सूची के अलावा वकील अपने मामले पर अत्यावश्यक सुनवाई जैसी मांग भी करते थे। यह मौखिक अनुरोध सुप्रीम कोर्ट की तय, अनुरोध प्रक्रिया से अलग होती था।

सुप्रीम कोर्ट में अनुरोध की एक तय प्रक्रिया है जिसमें पहले मेंशनिंग रजिस्ट्रार के पास जाकर अपने मुकदमे को नियमित सुनवाई के बाद होने वाली अनुरोध सूची में शामिल कराना पड़ता है। इन मामलों की फाइल पहले न्यायाधीशों के पास जाती है और वे मामला पढ़कर अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई पर गौर करते हैं।

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One thought on “प्रधान न्यायाधीश ने शपथ लेते ही प्रणाली में सुधार की शुरुआत की: मौखिक अनुरोध ठुकराया”

  1. बिलकुल सही, यही होना चाहिए।

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