धारा 156 (3) के अंतर्गत प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्रों पर एफआईआर दर्ज करने की अनिवार्यता के आदेश पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दण्ड़ प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्रों पर अनिवार्य रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाते हुए सम्बन्घित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। राजस्थान सरकार की एक विशेष अनुमति याचिका पर 11 मई को को राजस्थान सरकार बनाम बाबूलाल एवं अन्य मामले में न्यायाधीश ए कबीर और न्यायाधीश एचएल गोखले की खण्डपीठ ने सुनवाई की। राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉं. मनीष सिंघवी ने पैरवी की।

राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मार्च 2009 को आदेश दिया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत यदि कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त होता है तो मजिस्ट्रेट को उस पर एफआईआर दर्ज कराने और मामले की जांच करने का आदेश अनिवार्य रूप से देना होगा।

इस आदेश के विरूद्घ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दर्ज की। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि न्यायाधीश को इस प्रकार की किसी बाध्यता के बजाए अपने विवेक से मामले को देखना चाहिए और अपने विवेकाधिकार का उपयोग करने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने के संबंध में कोई आदेश देना चाहिए, क्योंकि कई बार एफआईआर दर्ज करवाने के पीछे अनेक झूठी शिकायतें और बदनीयती पाई जाती है। ऎसी स्थिति में न्यायाधीशों को अपने स्व-विवेक का उपयोग करते हुए आदेश पारित करने चाहिए।

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15 thoughts on “धारा 156 (3) के अंतर्गत प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्रों पर एफआईआर दर्ज करने की अनिवार्यता के आदेश पर रोक”

  1. सेवा में श्रीमान जी विन्रम निवेदन है, की धारा 156/3 के सब झुठे मुकदमे दायर किये जाते जिसमें डा० की फर्जी रिर्पोट लगायी जाती है| जिससे दोनो पक्ष बर्बाद हो जाते है और फर्जी मुकदमे बनाने बाले दलाल गरीब किसान को लूटे खाये जा रहें हैं जिससे भुख मरी अशिक्षा बेरोज्रगारी दे श की सब उन्न्ती कमजोर हो रही हैं | अत: श्रीमान निवेदन है कि फर्जी 156 /3 के मुकदमो पर रोक लगायी जाये|

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    1. बिलकुल राइट सर ऐसा हादसा मेरे साथ २६/८/२०१७ को होते हुए बचा जमीनी विवाद को लेकर वो ४२० के तरीके से जमीन लेना चाहता था लेकिन हमारे २५/८/२०१७ कोko मना करने पर उसने अगले दिन वकील से मिलकर धारा 156/३ की एफ आई आर दर्ज कराइ फिर कोतवाली सेse मुझे और mere चाचा जी को पुलिस ले गई काफी पूछ टाँच के बाद मैंने जो जमीन के मामले की वीडियो क्लिप बना ली thi वही मैंने कोतवाल साहब को दिखाई तो मामला समझ में आया औरaur फिर हमें और चाचाchacha जीji कोko अपनी अपनी दुकानों पे कॉन्स्टेबल से स्वतः छोड़ने को आदेश दिय ऐसे पता नहीं ऐसे ये भेड़िये पतानहीं समाज में rah कर किसको apna chnd रुपयों के चक्क्र मेंme किस गारीब औरur छोटे लोगो कोko अपना निशाना बनाbana कर जिंदगी को बर्बाद कर दे 8896839451

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    2. बिलकुल राइट सर ऐसा हादसा मेरे साथ २६/८/२०१७ को होते हुए बचा जमीनी विवाद को लेकर वो ४२० के तरीके से जमीन लेना चाहता था लेकिन हमारे २५/८/२०१७ कोko मना करने पर उसने अगले दिन वकील से मिलकर धारा 156/३ की एफ आई आर दर्ज कराइ फिर कोतवाली सेse मुझे और mere चाचा जी को पुलिस ले गई काफी पूछ टाँच के बाद मैंने जो जमीन के मामले की वीडियो क्लिप बना ली thi वही मैंने कोतवाल साहब को दिखाई तो मामला समझ में आया औरaur फिर हमें और चाचाchacha जीji कोko अपनी अपनी दुकानों पे कॉन्स्टेबल से स्वतः छोड़ने को आदेश दिय ऐसे पता नहीं ऐसे ये भेड़िये पतानहीं समाज में rah कर किसको apna chnd रुपयों के चक्क्र मेंme किस गारीब औरur छोटे लोगो कोko अपना निशाना बनाbana कर जिंदगी को बर्बाद कर दे

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  2. श्रीमान सादर प्रणाम
    श्रीमान मैं एक प्रतियोगी छात्र हूँ और मैं SSC की तैयारी करता हूँ मेरे पिता जी और माता जी ने काफी मेहनत मजदूरी करके मुझे शिक्षा दी । श्रीमान मैने अपना स्नातकोत्तर 2013 में बरेली कॉलेज से पूरा किया लेकिन कुछ लोगो को यह अच्छा नही लगा और सुमित नाम के एक शख्स ने मेरे पिता जिक और मेरे छोटे भाई जोकि भारतीय सेना में जाने के लिए लगातार कठोर परिश्रम कर रहा है और मेरे खिलाफ सरासर झूँठी 156/3 कोर्ट में डाल दी जिसके कारण मैं इतना घबरा गया कि मैं एक साल से अपने लक्ष्य पे ध्यान नही दे पा रहा हूँ । कोर्ट में मामला एक साल से चल रहा है जिस व्यक्ति ने यह केस डाला है वह अपने आप को पत्रकार बताता है जबकि वह एक शातिर अपराधी किस्म का इंसान है । घर पर सब बहुत परेशान रहते है कि पता नही कोर्ट क्या फैसला सुना दी कही FIR का आदेश न दे दे । जो मेरा समय बर्बाद हो रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है क्या कोई मुझे मेरे कीमती समय बापस करेगा । इसके कारण घर का मेहनत मजदूरी का पैसा बर्बाद हो रहा है । श्रीमान यह 156/3 के फर्जी केस डालने बालो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवायी की जाए जिससे मेरे जैसे किसी और के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न कर सके । आशा करता हूँ जो मेरे परिवार के खिलाफ झूँठा केस डाला गया है उस केस को कैंसिल कर उस झूंठे इंसान के खिलाफ कठोर कार्यवायी की जाएगी ।
    धन्यवाद !

    भवदीय
    निर्दोष दीक्षित

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  3. सर, १५६/३ पर रोक लगायी जाये ताकि बेगुनाहो को सजा न मिले |

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  4. बिल्कुल सही बात फर्जी इस्तगासो पर रोक लगनी ही चाहिए
    श्रीमान
    ऐसा हादसा हमारे साथ भी हो रहा है, एक व्यक्ति को हमने जरूरत मे पैसे दिए ,समय गुजरने पर जब हमने वापस पैसे माँगे तो उसने मेरे वृद्ध पिताजी व ताउजी पर अपहरण का झुठा केस लगा दिया, हम काफी डर गये हमें पुछताछ का सामना करना पड़ा आखिर पुलिस को सारा माजरा समझ मे आ गया और पुलिस ने जल्दी ही उसके द्वारा छुपाये लड़के को बरामद कर लिया हमारी भी जान मे जान आई मगर कुछ ही दिनों बाद एक पुलिसकर्मी पिताजी व ताऊजी का समन लेकर आया तो पता चला कि उस व्यक्ति ने इस्तगासे के द्वारा अपहरण का झुठा केस दायर कर दिया ,आज उस केस को चलते नौ साल हो गये पिताजी हर पेशी पर जाते हैं और खुन के आँसू रोते है पैसा भी गया और बदनामी भी हो रहीं है कोर्ट का फैसला पता नहीं कब आएगा , पता नहीं जब तक हम क्या क्या खो देंगे !
    हम सच्चे है फिर भी हम परेशान हो रहें है,और जिसने हमें झुठे इस्तगासे से फसाया वो मौज मे है

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  5. वाह रे ipc १५६ (३) ईमानदार लोगो को परेशांन करने का बेईमानों का हथियार है पुलिस वालो का Piasa कमाने का

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  6. श्रीमानजी उपरोक्त तथ्य मैंने पढ़े थे लेकिन इन तथ्यों में बनावटीपन ज्यादा है और सत्यता कम कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को गलत तथ्यों के आधार पर कभी नहीं बता सकता कोर्ट को अपने विवेक का अधिकार प्रयोग करने का पावर है कोर्ट कभी भी किसी झूठे व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने के आदेश पारित नहीं करती है कोर्ट में बैठे हुए जजों का इतना अनुभव है कि वह कभी भी किसी भी गलत व्यक्ति को प्रश्न नहीं देती है और झूठे व्यक्ति को या मक्कार व अपराधी को कोर्ट छोड़ती नहीं है इसलिए धारा 156 3 किसी भी परिस्थिति में सही है इस पर रोक लगाया जाना अनुचित है और बेतुका कानून जो राजस्थान सरकार लेकर आई है वह किसी भी परिस्थिति में पारित नहीं होना चाहिए यदि यह कानून पारित हो जाता है तो जो लोग भ्रष्ट है इनका हौसला बढ़ जाएगा और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर बढ़ता हुआ आम जनता के लिए यह कानून खतरनाक साबित हो जाएगा क्योंकि इस कानून के तहत 6 महीने तक सरकार अपने पास नौकर रख सकती है फायर होने को और 6 महीने के अंतराल एक की अपराधी व्यक्ति एक भ्रष्ट व्यक्ति अपने आप का बचाव कर लेगा भ्रष्टाचार में भी भ्रष्टाचार होगा 1 भ्रष्टाचारी व्यक्ति नेता को तो अच्छी तरह खरीदने में सक्षम है क्योंकि भ्रष्टाचारी भ्रष्टाचार करने से पहले यह सोच समझकर भ्रष्टाचार करेगा कि 6 महीने की अवधि में मैं इस भ्रष्टाचार को करने से कैसे बच सकें और मेरे ग्रुप किसी भी प्रकार की यदि कार्रवाई होती है तो मैं 6 महीने के अंतराल में उस कार्रवाई से किस प्रकार बन सकूं यह पहले तैयारी करके ही कोई आदमी भ्रष्टाचार करेगा इसलिए मैं समझता हूं कि भ्रष्टाचार के यह जो कानून के खिलाफ नहीं हो भ्रष्टाचार के पक्ष में पारित किया गया है जो सरकार की मनसा यह दर्शाता है कि यह केवल भ्रष्टाचारियों का सहयोग करने वाला कानून है इस पर रोक लगनी चाहिए FIR पर रोक नहीं हो के कानून पर रोक लगना चाहिए यह कानून किसी भी परिस्थिति में पारित नहीं होना चाहिए

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    1. भाई साहब एक फर्जी इंसान ने मेरी पढ़ाई बर्बाद कर दी है औऱ आप इस धारा को समर्थन दे रहे है , में परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक नही थी और अब वकीलों के लिये हर तारीख पर रुपये की इधर उधर से व्यवस्था करता हूँ , जानते है मेरे घर पर सब कितने परेशान है आप क्या जानेंगे ,

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      1. Ye sahi baat ha ki 156 3 is dhara se jhoote log jhuta case darj krwa ker dusro ko pareshan krte h iske liye un logo ko punishment milni cbahiye

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  7. नमस्ते सर
    मै घर का अकेला जिम्मेदार हू घर पर सिर्फ मै मम्मी और पापा है बस अपने काम बेसत रहता हू ना किसी ना किसी से देना सर लेकिन गाव के कुछ लोग जलन मे एक हरिजन से हमारे ऊपर 156’3 मे मुकदमा करवा दिया और ऊसमे और भी धारा है
    जबकी ए सरा सर फर्जी है बिल्कुल गलत है जबकी हमारा कैरियर हमारी जिदंगी तबाह हो सकती
    इस धारा को क्या कहू जो जबभी चाहे किसी के ऊपर लगा सकता ।है अगले की अच्छी खासी जिदंगी तबाह करदे
    आप बताइए सर इससे बचने के लिए क्या किया जाए

    सर क्या मै ऊसके ऊपर कोई मुकदमा कर सकता हू

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  8. सर् जी
    में घनाराम वर्मा 1 महीने से थाने में fir करने भटक रहा हूँ ti fir नही होगा कहता है 420 का मामला है सरपंच के खिलाप वह गुंडागर्दी करता है । वह मुझे चाकू लेकर दौड़ाया भी है वह मेरा पैसा लग रहाहै

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  9. ये सभी लोग गलत बोल रहे है .१५६(३)के चलते कोई अफसर अपने पावर का दुरुपयोग नही कर सकता क्योकि किसी भी पोलीस अधिकारी पर पोलीस स्टेशन मे तो कोई आम आदमी जाकर उसपे fir सीधे नही कर सकता इसके चलते आम आदमी कोर्ट मे जाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपनी पूरी बात रख सकता है .इसमे किसी का दबाव नही होता है और अंत मे १५६(३)का आदेश ही पब्लिक का सहायता करता है ..☝☝☝☝☝☝☝☝☝

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  10. महोदय,
    मेरे बैक खाता के धनराशि से बैक मैनेजर द्वारा बिना मेरे अनुमति के गलत ट्राँजेक्शन किये गये तथा मेरे बैंक खाता से 2,00,000/-(दो लाख रुपये) निकाल लिया गया है।जो कानूनी ढंग से गलत है।बावजूद इसके क्षेत्रीय थाना द्वारा FIR दर्ज नही किया जा रहा है।जिससे मुझे इंसाफ मिले।
    कृपया मुझे सही दिशा निर्देश दे। मै सदा आभारी रहूँगा।

    अरविंद सिंह

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