कंपनी अधिनियम 2002 में किए संशोधन की संवैधानिक वैधता बनी रहेगी

उच्चतम न्यायालय ने कंपनी अधिनियम 2002 में किए संशोधन की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है। इसके साथ ही कंपनी मामलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के गठन का रास्ता साफ हो गया। मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सरकार की याचिका पर व्यवस्था देते हुए कंपनी कानून 2002 में संशोधन की वैधता बरकरार रखी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ शर्ते भी जोड़ीं। मद्रास उच्च न्यायालय ने छह साल पहले एनसीएलटी के गठन के लिए कंपनी अधिनियम 1956 में संशोधन को असंवैधानिक करार दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। इस फैसले के बाद एनसीएलटी के गठन में कोई अड़चन नहीं आएगी और कंपनी लॉ बोर्ड , बीआईएफआर तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित कंपनी विवाद एनसीएलटी में स्थानांतरित किए जाएंगे।

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  • कंपनी ( संशोधन ) अधिनियम 2002

2 thoughts on “कंपनी अधिनियम 2002 में किए संशोधन की संवैधानिक वैधता बनी रहेगी”

  1. आभार, ये मेरे काम की जानकारी है.

    एक अपील:

    विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

    हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

    -समीर लाल ’समीर’

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