ई-बाईक को सायकिल नहीं कहा जा सकता: बैटरी चालित उत्पाद की तरह 12 प्रतिशत कर लगाया जाएगा

बांबे हाईकोर्ट ने बिक्री कर संबंधी एक विवाद में फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी ऐसा वाहन जो ऊर्जा के स्रोत का इस्तेमाल करता हो, उसे साइकिल नहीं कहा जा सकता। न्यायमूर्ति वीसी डागा और केके टाटेड़ की खंडपीठ ने व्यवस्था दी कि कर में छूट के लिहाज से बैटरी चालित साइकिल, जिसे आमतौर पर बाइक कहा जाता है, पर सामान्य साइकिल के समान कर नहीं लगाया जा सकता।

थाणे की केके रिम प्राइवेट लिमिटेड ने बिक्री कर आयुक्त के समक्ष वर्ष 2007 में दाखिल अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उसके साइकिल उत्पाद ‘माडल मैट्रिक्स’ (ई-बाइक मैट्रिक्स) पर सामान्य साइकिल के समान चार प्रतिशत की दर से कर लगाया जाना चाहिए।

दरअसल, माडल मैट्रिक्स साइकिल में पैडल के अलावा एक बैटरी भी लगी होती है, जिससे इसे चलाने में आसानी होती है। कंपनी को आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ने भी इस आशय का प्रमाणपत्र दिया है कि यह मोटर वाहन नहीं है।

बिक्री कर आयुक्त और अपीली न्यायाधिकरण ने हालांकि कहा कि इस उत्पाद को साइकिल नहीं कहा जा सकता और इस पर इलेक्ट्रिकल बैटरी चालित उत्पाद की तरह 12 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा। कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने बिक्री कर प्राधिकरण के तर्क को बरकरार रखते हुए कहा, ‘यदि कोई वाहन किसी भी प्रकार की ऊर्जा का इस्तेमाल करता है तो उसे साइकिल नहीं कहा जा सकता।

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