‘प्रासंगिकता खो चुके कानूनों को समाप्त करना होगा’: प्रधान मंत्री

प्रधानमंत्नी मनमोहन सिंह ने आम आदमी को आसानी और सुलभता से जल्द न्याय उपलब्ध कराने के हर संभव प्रयास करने की जरुरत पर बल देते हुये कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई की 71 अतिरिक्त अदालतें स्थापित की जायेंगी। श्री सिंह ने कहा कि उनकी सरकार आम आदमी को कानूनी तौर पर सशक्त बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा सभी नागरिकों को जल्द न्याय उपलब्ध कराने के सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार काम करेगी। वह कांग्रेस के कानून और मानवाधिकार विभाग द्वारा आयोजितकानून न्याय और आम आदमीविषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्नी ने हर स्तर न्यायालयों में बडी संख्या में लंबित मामलों पर चिंता जताते हुये कहा कि हमें इससे निजात पाने के उपाय करने होंगे। उन्होंने कानूनी सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुये कहा कि जहां हमें प्रासंगिकता खो चुके कानूनों को समाप्त करना होगा या उनमें बदलाव करना होगा वहीं प्रक्रियागत कानूनों को मजबूत बनाना होगा। हमें समाज के कमजोर और उपेक्षित लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी होगी।

उन्होंने कहा कि मामलों को तेजी से निपटाने के लिय विभिन्न राज्यों में 71 अतिरिक्त सीबीआई अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। इसके अलावा राज्यों से ग्राम न्यायालय अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करने के लिये कहा गया है। इस कानून के पूरी तरह से लागू होने पर पंचायत स्तर 5000 ग्राम न्यायालयों की स्थापना होगी। इससे आम आदमी को उसके घर के पास न्याय सुलभ हो सकेगा।

डा. सिंह ने गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों को अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिये जरुरी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर देते हुये कहा कि यह काम कानूनी शिक्षा अभियान, कानूनी प्रशिक्षण कार्यक्रम, विवादों को अदालत के बाहर निपटाना और मुफ्त कानूनी सहायता के जरिये किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कानूनी और न्यायिक सुधार की जिम्मेदारी केवल न्यायपालिका और विधायिका की ही नहीं है यह उत्तरदायित्व कार्यपालिका तथा वकीलों का भी है तथा इस दिशा में आगे बढने के लिये हम सभी को मिलकर योगदान करना होगा। उन्होंने वकीलों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में पहल करें और रास्ता दिखायें।

प्रधानमंत्नी ने कहा कि कुछ समय पहले मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्नियों के सम्मेलन में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सरकार न्याय प्रशासन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिये कोई कसर नहीं छोडेगी जिसे वह आज फिर दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी और न्यायिक सुधारों की दिशा में बार और न्यायपालिका की ओर से उठाये जाने वाले कदमों में सरकार पूरा सहयोग करेगी।

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Posted by on Mon, 29 Mar 2010 17:30:00. Filed under विविध मुद्दे. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

3 Comments for “‘प्रासंगिकता खो चुके कानूनों को समाप्त करना होगा’: प्रधान मंत्री”

  1. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    प्रधान मंत्री का भाषण अच्छा और चतुराई भरा है। लेकिन उन्हों ने अधीनस्थ अदालतों की संख्या 35 हजार किए जाने के मामले में कोई बात नहीं कही।

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  2. शंकर फुलारा

    इस अंग्रेजों के बनाये कानून को समाप्त करके , भारतीय कानून बनाना चाहिए | वैसे तो ये कार्य १९४७ में ही हो जाना चाहिए था पर अब भी कांग्रेस इस कानून को बदल कर अपनी भूल का पश्चाताप कर सकती है |

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  3. देश में लोगों के जीवन की लय बहुत धीमी है ऐसा एक बार वाजपेयीजी ने कहा था| देश की आजादी के लिए पहली बार स्वर 1857में उठा था और देश वास्तव में नब्बे वर्ष बाद १९४७ में आज़ाद हुआ| यह हमारी कार्य करने की गति है जिसे हमें भूलना नहीं चाहिए | मनमोहन सिंघजी अपनी पिछली बारी में न्यायिक दायित्व अधिनियम लाने की बातें किया करते थे और वह आज तक नहीं आ पाया है और शायद उनकी इस चालु अवधि में तो क्या अगली अवधि में आजाये तो ही गनीमत समझें | देश की गरिब और ना समझ जनता को पहले मुगलों ने , बाद में अंग्रेजों ने और अब जनप्रतिनिधि शोषण कर रहे हैं| हाँ नाक बचाने के लिए कुछ दिखावा जरूर कर देते हैं जिससे जनता को लगे कि परिवर्तन आ रहे हैं |किन्तु आज़ादी के बाद आज तक लोकसेवकों को पूर्व में प्राप्त संरक्षण और अधिकारों में कोई कटौती नहीं हुए है तथा देश की जनता आजादी का भ्रम पाले बैठी है | मेरा भारत महान है ………

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