तुच्छ आधारों पर विशेष अनुमति याचिकाएं दायर होती रहीं तो सुप्रीम कोर्ट इसके भार से दब जाएगा

तुच्छ आधारों पर विशेष अनुमति याचिकाएं दायर करने की भर्त्सना करते हुए उच्चतम न्यायालय ने आगाह किया है कि अगर यह प्रवृत्ति नहीं रूकी तो वह उनके भार से दब जाएगा। उसने ऎसी याचिकाओं के बारे में मानदंड तय करने के लिए मामले को एक संवैधानिक पीठ को सौंप दिया।

न्यायमूर्ति मार्केंडेय काट्जू और आरएम लोढ़ा की खंडपीठ ने कहा कि अगर किसी अदालत अथवा न्यायाघिकरणों के सभी और विविध तरह के फैसलों के खिलाफ चुनौती वाली विशेष अनुमति याचिकाओं पर विचार किया जाता रहा तो कुछ समय बाद यह न्यायालय खुद अपने भार तले दब जाएगा।
खंडपीठ ने कहा कि आज स्थिति इतनी दुखद है कि अदालत में मामलों की भरमार के चलते न्यायाधीश मामलों पर विचार के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते, जिसके कि वह हकदार हैं और इससे फैसलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
न्यायालय ने मथाई नामक एक व्यक्ति की विशेष अनुचित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह व्यवस्था दी। मथाई ने विवादास्पद वसीयत की दूसरी बार फोरेन्सिक जांच पर सुनवाई अदालत और केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए इसे दायर किया था।
खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 136 न्यायालय को निचली अदालतों, न्यायाघिकरणों के फैसले के खिलाफ अपील पर विवेकाघिकार के तहत विचार का अघिकार देता है। इसका इस्तेमाल विशिष्ट मामलों में ही किया जाना चाहिए। मसलन गंभीर प्रवृत्ति के संवैधानिक मामले, न्याय का गंभीर उल्लंघन तथा मौलिक अघिकारों के हनन जैसे मामलों पर इसका इस्तेमाल होना चाहिए। संवैधानिक योजना के तहत साधारण मामलों की अंतिम अदालत उच्च न्यायालय है।

उच्चतम न्यायालय संवैधानिक प्रश्नों अथवा भारी अन्याय वाले मामलों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उसके पास सीमित समय होता है और उससे हर तरह के विवाद पर सुनवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। खंडपीठ ने कहा कि यह फैसला अब संवैधानिक पीठ को करना है कि अनुच्छेद 136 के तहत विवेकाघिकार का इस्तेमाल किस तरह के मामलों पर किया जाए। अब समय आ गया है जब कोई संवैधानिक पीठ के फैसले के तहत इस बारे में व्यापक दिशा-निर्देश तय किए जाएं कि संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत कब विवेकाघिकार का इस्तेमाल हो।

मामले में मदद के लिए संवैधानिक पीठ न्यायालय की सहायता के लिए कोई वकील (एमीकस क्यूरी) नियुक्त कर सकती है, ताकि सभी संबंघित पक्षों के विचारों को ध्यान में रखकर इसे सुलझाया जाए। खंडपीठ ने मुद्दे पर जवाब देने के लिए बार कांउसिल ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तथा सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉड्र्स एसोसिएशन को नोटिस जारी किए।

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One thought on “तुच्छ आधारों पर विशेष अनुमति याचिकाएं दायर होती रहीं तो सुप्रीम कोर्ट इसके भार से दब जाएगा”

  1. स्थिति विकट है इसमें कोई शक नहीं ..और इसके लिए जिम्मेदारी भी अलग अलग है सबकी …
    अजय कुमार झा

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