कृष्ण-राधा वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी की मांग करने वाली जनहित याचिका

सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी की मांग करने वाली एक जनहित याचिका, विवाह पूर्व यौन संबंध और बिना विवाह के साथ-साथ रहने संबंधी फैसले में भगवान कृष्ण और राधा भी साथ-साथ रहते थे वाली टिप्पणी पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में 25 मार्च को चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन, जस्टिस दीपक वर्मा व जस्टिस बीएस चव्हाण की तीन सदस्यीय खंडपीठ के खिलाफ दायर की गई है तथा कहा गया है कि यह टिप्पणी वापस ली जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की उक्त तीन सदस्यीय खंडपीठ ने दक्षिण भारत की अभिनेत्री खुशबू की याचिकाओं की सुनवाई में उक्त टिप्पणी की थी। इस पर आनंद ट्रस्ट के ट्रस्टी सत्यपाल आनंद ने 25 मार्च को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर में जनहित याचिका पेश कर कहा कि इस उदाहरण टिप्पणी से देश के करोड़ों लोगों को ठेस पहुंची है। इससे कानून व्यवस्था और देश के हालात बिगड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को इस मामले पर दोबारा सुनवाई कर अपने शब्द वापस लेना चाहिए। न्यायाधीश संविधान के ज्ञाता होते हैं धार्मिक ग्रंथों के नहीं इसलिए उन्हें ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

श्री आनंद ने यह याचिका हाई कोर्ट इंदौर में पेश की। चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों से संबद्ध था इसलिए बाद में उन्होंने हाई कोर्ट के पते पर टेलीग्राम के जरिए भी याचिका भेजी।

मामला यह है कि दक्षिण भारत की सिने तारिका खुशबू ने वर्ष 2005 में एक साक्षात्कार में कहा था कि विवाह पूर्व युवक-युवती के साथ रहना और यौन संबंध अनुचित नहीं है। साक्षात्कार कई पत्रिकाओं में छपा था। इस पर उनके खिलाफ मद्रास के न्यायालय में 22 आपराधिक प्रकरण लगाए गए थे। मद्रास हाई कोर्ट में खुशबू ने वर्ष 2008 में अपने खिलाफ दायर प्रकरणों को समाप्त करने के लिए आवेदन दिया जो खारिज हो गया। इस पर अभिनेत्री ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है।

जनहित याचिका पर प्रतिक्रियाओं के दौर में कहा जा रहा है कि दक्षिण की अभिनेत्री खुशबू के मामले में सुनवाई के दौरान जब किसी भी वकील ने अपनी दलील में राधा-कृष्ण का जिक्र नहीं किया तो जजों को इस तरह की टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। वैसे भी कोर्ट को केवल संविधान की ही बात करना चाहिए।

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3 thoughts on “कृष्ण-राधा वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी की मांग करने वाली जनहित याचिका”

  1. बहुत बढ़िया, जिसने भी किया है अच्छा किया, कोई तो हो जो न्यायालय की अवमानना से न डरता हो… 🙂

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