14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार 2010 के मध्य तक लागू होगा

केंद्र सरकार ने 6 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय से कहा है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार मुहैया कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसे 2010 के मध्य तक लागू किया जाएगा। सरकार ने कहा कि इसे लागू करने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं जो कि अप्रैल अथवा मई तक तैयार हो जाएंगे। प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और बीएस चौहान की खंडपीठ के समक्ष महाधिवक्ता गोपाल सुब्रहमण्यम ने यह बात कही। वकील एमसी मेहता ने एक याचिका दाखिल कर समाज से बाल मजदूरी समाप्त करने और निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा कानून लागू करने की मांग की थी।

वर्ष 2002 में 6-14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा मुहैया कराने के लिए संविधान में संशोधन किए गए थे, जिसे अब सात साल बीत चुके हैं। संसद ने निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा विधेयक को चार माह पूर्व पारित कर दिया था,लेकिन अभी तक न तो इस कानून को अधिसूचित किया गया है और न ही यह लागू हो पाया है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘अगर यह कानून बलपूर्वक लागू होता है तो बच्चे काम करने के बजाय स्कूल में होंगे।‘ न्यायालय ने इस मुद्दे पर उठाए गए कदमों के बारे में सरकार से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी।

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