हाई कोर्ट ने पूछा: ‘फांसी की सजा पाने वाले अभियुक्तों को जेल में किन परिस्थितियों में अकेले बंद किया जाए?’

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने, फांसी की सजा पाने वाले अभियुक्तों को जेल में किन परिस्थितियों में अकेले बंद किया जाए, इस तथ्य पर हरियाणा सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील नवकिरण सिंह की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया था कि अमृतसर जेल में एक ही परिवार के चार सदस्यों की फांसी की सजा के खिलाफ रहम की अपील राष्ट्रपति के समक्ष लंबे समय से विचाराधीन है। याचिका के विचाराधीन रहते उन्हें जेल में अन्य कैदियों से अलग अकेले बंद रखा गया है।
याचिका में मांग की गई कि यह इन कैदियों से भेदभाव है। ऐसे में इन्हें अन्य कैदियों के समान ही रखा जाना चाहिए। साथ ही लंबे समय से रहम की अपील विचाराधीन होने के चलते सजा को आजीवन कारावास में तबदील किया जाए। दैनिक भास्कर में ललित कुमार की रिपोर्ट है कि अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर चंडीगढ़ व हरियाणा की जेलों में परिस्थितियों की जानकारी मांगी है। तीन सप्ताह का समय देते हुए अदालत ने पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को किस तरह से लागू किया जा रहा है।

ललित कुमार की रिपोर्ट कहती है कि पंजाब की अमृतसर जेल में छह, पटियाला की जेल में चार और फिरोजपुर की जेल में छह कैदी फांसी की सजा पाने के बाद बंद हैं। वहीं हरियाणा की अंबाला जेल में तीन गुडगांव जेल में पांच और हिसार जेल में दो कैदी फांसी की सजा पाने के बाद बंद हैं।

चीफ जस्टिस मुकुल मुदगल व जस्टिस जसबीर सिंह ने मामले पर अगली सुनवाई 10 मार्च तय की है।
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