शिक्षकों के खाली पड़े पद भरने में सरकार नाकाम है तो अदालत किसी और एजेंसी को यह कार्य सौंप देगी

अभी कागजों पर मौजूद शिक्षा अधिकार कानून को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को सरकार से शिक्षा के प्रति अपना रवैया बदलने को कहा। अदालत ने आगाह भी किया कि दस साल में चीन में दुनिया में सबसे ज्यादा लोग अंग्रेजी बोल रहे होंगे। इसके मद्देनजर भारत में भी तैयारी होनी चाहिए। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पड़े पद भरने में सरकार के ढीले रवैये के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि अगर सरकार यह नहीं कर सकती तो अदालत किसी और एजेंसी को यह काम सौंप सकती है। कोर्ट ने सरकार को शिक्षा के प्रति सोच बदलने की नसीहत देते हुए कहा कि अगर यही हाल रहा तो दस साल में चीन आगे निकल जाएगा।

कोर्ट ने प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य, पीजीटी/लेक्चरर व टीजीटी शिक्षकों के खाली पड़े करीब छह हजार पद भरने के संबंध में संघ लोक सेवा आयोग या यूपीएससी और दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड से जवाब मांगा है। इन दोनों को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी को भी अपने 1761 स्कूलों में टीचिंग स्टाफ, बिल्डिंग व मूलभूत सुविधाओं के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
ये निर्देश दलबीर भंडारी व ए.के. पटनायक की पीठ ने एनवायरनमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन फाउंडेशन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए। याचिका में दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बदहाली का हवाला देते हुए स्कूलों में शिक्षक और मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने मुख्य सचिव का हलफनामा पेश किया, जिसमें शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों की जानकारी देते हुए कहा गया था कि भर्तियां यूपीएससी व दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के जरिए होती हैं, जिसमें डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। हलफनामे में कहा गया है कि कोर्ट के पूर्व आदेश के मुताबिक खाली पदों को जल्द भरने के लिए यूपीएससी व दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को सिफारिश भेजी जा चुकी है।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार की ओर से असमर्थता जताए जाने पर आश्चर्य और नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार अब मौलिक अधिकार बन चुका है। अगर यही हाल रहा तो अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा के मौलिक अधिकार को कैसे लागू किया जाएगा। चीन जाकर देखें तो वहां सभी छोटे बच्चे अंग्रेजी बोलते दिखेंगे।

कोर्ट ने जब देश भर के स्कूलों की हालत की बात की तो केंद्र सरकार की पैरवी कर रहे अतिरिक्त सालीसिटर जनरल ने कहा कि वह याचिकाकर्ता के वकील रवीन्द्र बाना के साथ बैठ कर रजिस्ट्रार, नेशनल यूनिवर्सिटी आफ एजूकेशनल प्लानिंग के हलफनामे पर विचार करेंगे, जिसमें देश भर के स्कूलों की बदहाली का ब्यौरा दिया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
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One thought on “शिक्षकों के खाली पड़े पद भरने में सरकार नाकाम है तो अदालत किसी और एजेंसी को यह कार्य सौंप देगी”

  1. सुप्रीमकोर्ट का यह कदम शायद सरकार को कुछ सोचने और करने को विवश करे।

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