पुरूषों के लिए आरक्षण था! अदालत ने लैंगिक आधार पर नियुक्ति न करने के आदेश दिए

पंजाब के स्कूलों में हेडमास्टर, लेक्चरर और मास्टर की नियुक्तियां अब लैंगिक आधार पर नहीं होगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के मुताबिक अब महिलाएं भी इन पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकेगी। जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस जोरा सिंह ने इसके लिए स्कूल कॉडर सेवा नियमों में जरूरी संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने कहा है कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों को छोड़कर अन्य पदों को लैंगिक आधार पर आरक्षण नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का असर पिछली नियुक्तियों पर नहीं होगा और केवल भविष्य में की जाने वाली नियुक्तियां ही इस आधार पर की जाएंगी। नीलम रानी और सात अन्य याचिकाओं में पुरुष मास्टर, लेक्चरर व हेडमास्टर का अलग कॉडर बनाने को चुनौती दी गई थी।

याचिकाओं में कहा गया कि पंजाब स्टेट राज्य श्रेणी-3 (स्कूल कॉडर) सेवा नियम 1978 में संशोधन किया जाए। इस नियम में लैंगिक आधार पर नियुक्तियों का प्रावधान किया गया है। यानी कुछ पद केवल पुरुष उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। याचियों का कहना था कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस पर अदालत ने कहा कि कोई पद केवल पुरुषों के लिए आरक्षण होने का तर्क देकर महिला उम्मीदवारों की दावेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पदों को मेरिट के आधार पर भरा जाना चाहिए और यदि कोई महिला उम्मीदवार ज्यादा योग्य है तो उसे इन पदों पर नियुक्ति मिलनी चाहिए।

बेंच ने कहा है कि इन पदों के लिए महिला व पुरुष उम्मीदवारों की संयुक्त मेरिट सूची बनाई जानी चाहिए। इसमें यदि महिला उम्मीदवारों का नंबर नहीं आता है तो मेरिट के मुताबिक उन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्ति दी जाए।
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