निठारी कांड: सुरेन्द्र कोली की फांसी की सजा पर रोक

उच्चत्तम न्यायालय ने बहुचर्चित निठारी कांड के मुख्य अभियुक्त सुरेन्द्र कोली की फांसी की सजा पर 7 जनवरी को रोक लगा दी है, साथ ही केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस भी जारी किया। कोली ने कहा कि जिस मकान में बलात्कार और जघन्य सिलसिलेवार हत्या की घटनाएं हुई उसका मालिक होने के नाते पंढेर पर ज्यादा जिम्मेदारी थी, लेकिन उसे बरी कर दिया गया, इसलिए वह भी बरी किए जाने का हकदार है। उसने यह भी दावा किया कि उसे दोषी ठहराया जाना पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। न्यायमूर्ति बी.एस.चौहान की खंडपीठ ने कोली के वकील बी.पी. सिंह ढाकरे की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई पूरी होने तक फांसी की सजा पर रोक लगा दी।

ढाकरे ने कहा कि इस मामले में अन्य अभियुक्त मोनिन्दर सिंह पंढेर की फांसी की सजा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है जबकि उनके मुवक्किल की सजा बरकरार रखी गई।
उल्लेखनीय है कि रिम्पा हलधर के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में निचली अदालत ने कोली और पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी जबकि इलाहबाद उच्च न्यायालय ने पंढेर को बरी कर दिया था। सी.बी.आई ने पंढेर को बरी किये जाने के उच्चा न्यायालय के फेसले को चुनौती नहीं दी, लेकिन रिम्पा के पिता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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